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Showing posts from February, 2024

दास

दास वो कहते रहे धर्म उनका खतरे में है, कुछ तो करो। हम बताते रहे हम हिंदू है, तुम बस प्यार से रहो। अहिंसा के पुजारी, सब को है माननेवाले। है क्षत्रियों के वंशज, नारी है हमारी पालनहारी। पर शायद उनको राजनीति ही है करनी। धर्म को दांव पर लगाकर, सत्ता है हथियानी। तुम अपना आपा ना खोना, धर्म आचरण यूं न छोड़ना। सब होगा ठीक तेरे साथ, बस बना रहे शिव का दास। -गोसाव्यांचा योगेश १० फरवरी, २०२४