वो अब बड़ा हो रहा है। वो अब बड़ा हो रहा है, मेरे सवालों का जवाब दे रहा है। ना चाहते हुये भी, एक आईना हात में दे रहा हैं। कुछ गलतियां मेरी, अब वो समझ रहा है। जानकर भी उनको नजरअंदाज करने लगा है। मेरा हो कर भी आजकल मैं डरने लगा हूँ। परछाई है मेरी, मैं जरा संभल के चल रहा हूँ। मेरे पिता की खुशी और दर्द आज समझ रहा हूँ। उनके पथ पर चलना नहीं आसान, हर कदम जान रहा हूँ। माँ उसकी दोस्त है मेरी, अब वो जान चुका हैं। फायदा उसका अलग तरह से अब वो लेने लगा है। नन्ही जान अब कुछ तेजी से बड़ी हो रही हैं। लौट चुका बचपन मेरा, हर दिन दिखा रही है। प्यार वो अब सब से करने लगा है। बचपन मेरा अब जवानी की और चला है। -योगेश गोसावी ३० दिसंबर, २०२०