मैं, कुछ अलग सा! हुआ था प्यार मुझे, और तुम्हें भी। सही था, गलत था, इस विचार से कोसों दूर। बहना उसके कारण, गवारा न था मुझे, और तुम्हें भी। हसीन मोड था, हकीकत की दुनिया से कोसों दूर ही। लड़खड़ाए नहीं पांव मेरे, और तेरे भी। प्यारा सफर था, जितना ही था, भाग दौड़ से थोड़ा दूर ही। रास्ते अलग है अपने, जानता था मैं, और तू भी। आज भी इसलिए है चेहरों पे मुस्कान मेरे, और तेरे भी। रोजमर्रा की जिंदगी में आएं कभी आसूं मेरे, और तेरे भी। कर लेना याद तेरा मुझे सताना, और मेरा तुझे रुलाना भी। हकीकत हूं और थोड़ा अफसानासा, दोस्त है ये तेरा, जो कहता हैं, हां हूं मैं थोड़ा अलगसा। -गोसाव्यांच्या योगेश ५ फेब्रुवारी, २०२५