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Showing posts from August, 2022

कृष्ण

कृष्ण तुम मनाओ खुशियां मेरे जन्म की, और मैं दुविधा में घिरा हूं अपनी ही। देवकी की हालत, अब तुम क्या समझोगे, बारात घर से खुद ले गए थे वसुदेव खुशियोंकी। जन्म मेरा भले ही हुआ था अधर्म के घने अंधियारे में, पर में खुद उजाला ले चला था देवकी की कोख से। धर्म रक्षणार्थ अवतार मेरा चाहा था सभी ने, बस कीमत उसकी देना सीखा था मेरे पांडवोंने। भले जमाना बदल गया कितना भी, परछाई आज भी मेरी दिखे, जो देखे नजर उधार ले मीरा की। पर राधा मेरी अब ना आयेगी लौट यहां, बांसुरी मैं अब भी बजा रहा उसी के लिए यमुना पार वहां। -गोसाव्यांचा योगेश १९ ऑगस्ट, २०२२

तिरंगा

तिरंगा कुछ पल तेरे साथ, याद उनकी दिलाते है कुछ न थे हमारे, जो सबकुछ बन गए है। बलिदान देकर जिन्होंने, तुम्हें हमसे मिलवाया है, बता ए तिरंगे, कौनसा काम हमे फ़रमाया है? हर घर तुझसे अब सजने लगा है, पर बलिदान कौनसा मांगा है? एक सैनिक के सिवा, कौन तेरी कीमत जाना है। आने वाले युगों से, जरा बात करके देखना बताना जरा, क्या तेरी योग्य हमने खुदको संभाला है? हम भारतीयोंको सबक ऐसा सिखलाजा, तीन रंगों से बने तिरंगे, हमें एक भारतीय रंग में रंग जा! -गोसाव्यांचा योगेश १७ ऑगस्ट, २०२२

ध्वज

ध्वज करितो आम्हीं ध्वजवंदन संध्या समयी आमुच्या, प्रभात व्हावी तुमची पायथ्याशी याच्या! धर्म कोणता आणि कोणती जाती पाती, भारतीय धर्म विसरावा इतकी झडली का मती? ऊंच ऊंच फडकत ठेवा तिरंगा आपुला, धारातीर्थी शुरांना तो स्वर्गातूनही दिसावा! अनंताच्या प्रवास समयी निश्चिंत करा आम्हां, एकोप्याने रक्षीत राहा या भारत देशा! -गोसाव्यांचा योगेश १४ ऑगस्ट, २०२२