तिरंगा
कुछ पल तेरे साथ, याद उनकी दिलाते है
कुछ न थे हमारे, जो सबकुछ बन गए है।
बलिदान देकर जिन्होंने, तुम्हें हमसे मिलवाया है,
बता ए तिरंगे, कौनसा काम हमे फ़रमाया है?
हर घर तुझसे अब सजने लगा है, पर बलिदान कौनसा मांगा है?
एक सैनिक के सिवा, कौन तेरी कीमत जाना है।
आने वाले युगों से, जरा बात करके देखना
बताना जरा, क्या तेरी योग्य हमने खुदको संभाला है?
हम भारतीयोंको सबक ऐसा सिखलाजा,
तीन रंगों से बने तिरंगे, हमें एक भारतीय रंग में रंग जा!
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ ऑगस्ट, २०२२
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