किस्सा यादों का
क्यों सजाते हो यादों की महफ़िल, बस वक्त ही बर्बाद होता है।
आज और कल का फिर तुम्हें कहाँ ठिकाना होता है?
आज और कल का फिर तुम्हें कहाँ ठिकाना होता है?
दो बाते दिल की, चाहें किसी से कर लेना,
आज की इस रफ़्तार में, फिर तुम कल की और बढ़ना।
आज की इस रफ़्तार में, फिर तुम कल की और बढ़ना।
यादों में उलझना, कहाँ किसी को आगे बढ़ाता है?
लहरें हैं वो समंदर की, किनारे से अंदर खींचा जाता हैं।
लहरें हैं वो समंदर की, किनारे से अंदर खींचा जाता हैं।
पीछे देखना भी है जरुरी, पर कितना?
सफर आगे का ना भटक जाए, बस उतना।
सफर आगे का ना भटक जाए, बस उतना।
आज में जीना सिख, तुझे योगी बताता हैं।
कल की यादें हसीन बनानेका रास्ता बतलाता है।
कल की यादें हसीन बनानेका रास्ता बतलाता है।
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ मई, २०२१
१७ मई, २०२१
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