जाने क्या कहना था ऊसे, मैंने सुना ही नहीं!
बात खुद की करते करते, मैंने कुछ समझा ही नहीं!
उलझा रहा अपनी उलझनों में, मैं इस कदर,
जो मेरा ही था, मैंने ऊसे पाया ही नहीं!
उलझा रहा अपनी उलझनों में, मैं इस कदर,
जो मेरा ही था, मैंने ऊसे पाया ही नहीं!
-गोसाव्यांचा योगेश
११ सितंबर, २०१९
क्यूँ पुछ रहे हो हाल जनाब, सब आपको पता है।
बिन मिले आपको जी रहे है, यही एक खता है।
बिन मिले आपको जी रहे है, यही एक खता है।
-योगेश गोसावी
१३ सितंबर, २०१९
बातें ना भायी मेरी तो भूल जाना उन्हें!
आयीना दिखाना हर किसिको आता नहीं।
गर ठीक लगे तो चले आना।
मुझे भी दिखाना परछाइंया मेरी!
-योगेश गोसावी
८ अक्टूबर, २०१९
८ अक्टूबर, २०१९
उसने एक बार पुछ क्या लिया, देखो जैसे कयामत आ गयी!
मुझ जैसे भले इन्सान पर, एक दिवानगीसी छा गयी!
-योगेश गोसावी
१२ नवम्बर, २०१९
ना जाने कौनसे गली से मुडना था मुझे?
ना जाने कैसे भटक गया हुं मैं?
ये क्या सोच रहा था मैं की
ईसी एक मुकाम पे अटक गया हूँ मैं!
-योगेश गोसावी
१५ नवम्बर, २०१९
बुलानेसे ना आयेगी, ना बतानेसे जायेगी,
मौत हे वो यारो, मनचली माशुका ही रहेगी!
-योगेश गोसावी
१९ नवम्बर, २०१९
बदल गया हूँ मैं ईसकदर, अपनों को भी बेगाना लगने लगा हूँ।
पा कर तेरी चाहत को, मैं कुछ अकेलासा हो गया हूँ।
-योगेश गोसावी
२५ नवम्बर, २०१९
ना चाहते हुये भी दर्द तुने जनमभर का दे दिया।
ना चढे और ना उतरे, ऐसा कौनसा जाम पिला दिया?
-योगेश गोसावी
२५ नवम्बर, २०१९
नहीं जाना था उस मुकाम पे, तो पता पुछा ही क्यूँ?
अब अगर पुछ ही लिया है, तो रुके हो क्यूँ?
-योगेश गोसावी
२५ नवम्बर, २०१९
तुम्हें परेशान करने का कोई इरादा नहीं है,
बस खुदको संवारने की कोशिशें जारी है।
-योगेश गोसावी
२५ नवम्बर, २०१९
ना चाहकर भी चाहना, कोई तुमसे सीखे!
और ना कर करभी, ईश्क निभाना कोई हमसे सीखे।
-योगेश गोसावी
२६ नवम्बर, २०१९
युहीं नहीं होता कोई तुम्हारें लिये पागल,
कुछ अच्छा करना पडता है।
वरना कहा हरबार सर्दीयों में बादल हमसे मिलने आता है।
-योगेश गोसावी
१७ दिसंबर, २०१९
पगली है वो हवा, पहाड से लिपटती रेहती है।
जिसके ना हात है ना पैर उसको बहाना चाहती है।
-योगेश गोसावी
१७ दिसंबर, २०१९
एक रात ही है जो सुकून देती है,
और कंबख्त तभी सब सोते है।
-योगेश गोसावी
१८ दिसंबर, २०१९
इंतजार किसिका नहीं, फिरभी आखें राहों पे है।
पता है कोई आनेवाला नहीं, फिरभी दिलकी धडकन तेज है।
ये मौसम है या वेहम है, की लगता है होनेवाली तेज बरसात है।
-योगेश गोसावी
१८ दिसंबर, २०१९
मुस्कुराकर सोती हो या सोये हुये मुस्कुराती हो, समझ नहीं पाता।
पर है ये तो वही मुस्कान, जिसे देख मैं चैन से सोता।
-योगेश गोसावी
१९ दिसंबर, २०१९
बाप हूँ मैं तेरा, कभी बोलदू तो सूनभी लिया कर।
तुझसे नहीं, गुस्सा खुदसे होता हूँ, थोडा समझभी लिया कर।
-योगेश गोसावी
१९ दिसंबर, २०१९
रब के आगे झुकते आज पता नहीं क्यूँ अच्छा लगा।
शायद किसीं और को किसीं और के लिये मांगने का ये असर हुआ।
-योगेश गोसावी
१९ दिसंबर, २०१९
प्यार और जरूरत दो अलग चिजें है दोस्त!
एक को दुसरे का नाम दोगे तो उम्रभर पछताओगे!
एक में दुसरा पाओगे तो जिंदगी सुलझाओगे!
-योगेश गोसावी
२२ दिसंबर, २०१९
उसकी देने की चाहत देख मुझे लेने की आस ना रहीं।
और शायद मेरी यहीं फितरत उसको और सुलगाने लगी।
-योगेश गोसावी
२३ दिसम्बर, २०१९
चल, कोई बात नहीं यारा!
कर लेंगे और थोडा हसीन खाँबो के साथ गुजारा!
पता है मुझसे जादा तुम तडपे होंगे।
ना मिलने की ये साझिश पे थोड़ा रोये भी होंगे।
रब होता ही है कुछ ऐसा प्यारा,
तड़पा कर ही देता है फल ये मीठा और न्यारा!
-योगेश गोसावी
२३ दिसम्बर, २०१९
लौट आये हम वहाँसे जहाँ हम पहुँचे ही नहीं।
कर आये उनको अलविदा जिनसे मिलेही नहीं।
-योगेश गोसावी
२४ दिसम्बर, २०१९
लगता है फिर कोई बात दिल में ही रह गयी।
एक और कली खिलनेसे पेहेलेही मुरझा गयी।
-योगेश गोसावी
२५ दिसम्बर, २०१९
वो पुछते है कैसे लिखते हो ये सब?
हम सोच में पड़ते है कौनसा झूठ बोले अब!
-योगेश गोसावी
२५ दिसम्बर, २०१९
तुम भी आना ईन पहाडोंसे मिलने कभी, खो जाओगे ईन में ही कहीं।
या क्या पता शायद मिल जाओ तुम तुमसेही यहीं।
-योगेश गोसावी
२६ दिसम्बर, २०१९
पता नहीं उनको क्यों लगता है हम दूर निकल आयें कहीं।
और एक हम है ढूंढते रेहते है उनको आसपास यहीं।
-योगेश गोसावी
२६ दिसम्बर, २०१९
दर्द मेरे गर कभी मेरे सामने आते,
गले लगाने की मेरी आदत देख वो खुद में ही डूब जाते!
-योगेश गोसावी
२६ दिसम्बर, २०१९
ख़ामोशसी ये रात तो हररोज होती है,
पर इतना सन्नाटा कभी नहीं होता।
लगता तूने आज भी शायद, मुझे सपनेमें भी नहीं देखा।
-योगेश गोसावी
२७ दिसम्बर, २०१९
चेहरा उनका देख हमेशा ये बैचेनी होती है,
क्यूँ गढी है दो आँखे मुझपर, हमेशा ये उलझन रेहती है।
-योगेश गोसावी
२७ दिसम्बर, २०१९
ना चाहते हुये भी अलविदा केह आया,
फिर एकबार अपने दिल को समझा आया।
आझाद परिंदा था मैं हवा से बाते कर रहा था,
अचानक मेरा आशिया मुझे जमी पे ले आया।
-योगेश गोसावी
२७ दिसम्बर, २०१९
दो सूखे लब फिर रसिले हो आये,
देके अजब उलझन उनको हम ये गुनाह कर आयें।
-योगेश गोसावी
२७ दिसम्बर, २०१९
नशे से प्यार करनेवाले शराब आसानी से पी जाते है,
एक हम है, जो भरे जाम से प्यार कर उसे पीना भूल जाते है।
-योगेश गोसावी
१ जनवरी, २०२०
थोडीसी खुशी भी बहुत उलझने सुलझा देती है।
जिंदगी हसीन ही है, बस उसे गुलजार बना देती है।
-योगेश गोसावी
२ जनवरी, २०२०
कुछ तो ईशारा दे जिंदगी, तुझे थोडा तो समझ जाऊ।
तू हसीन है या रंगीन, कुछ तो समझ पाऊ।
-योगेश गोसावी
२ जनवरी, २०२०
सफर हमारा यूँ जाया न होता ये जिंदगी,
गर तूने कहाँ कुछ और, और किया कुछ और ना होता।
-योगेश गोसावी
३ जनवरी, २०२०
कुछ हसीन यादें, बातें, लोग दे गया उन्नीस,
फिर हकीकत का सामना करवाने आया बीस।
-योगेश गोसावी
३ जनवरी, २०२०
ना चाहते हुयें भी हमसे खता हो ही जाती हैं।
दिल को बयां करने की आदत आफत ले ही आती है।
-योगेश गोसावी
३ जनवरी, २०२०
भरा हुआ जाम हूँ मैं, सबको अच्छा लगता हूँ।
गैरत तब होती है, जब थोडीसी बात पे छलकता हूँ।
-योगेश गोसावी
३ जनवरी, २०२०
रूह को झंझोड़कर पूछा क्या चाहिये,
सुकून के सिवा कुछ बोल न पाया।
जिस्म को उकसाकर पूछी जरूरत,
आराम के बगैर कुछ ना बोल पाया।
पर आयीने में खुद को बस दौड़ता ही देखा।
समझ ना आया ये सारा सिलसिला,
समझाने खुद को एक जगह पर टिक भी ना पाया।
-योगेश गोसावी
३ जनवरी, २०२०
तू यहां नहीं तो थोड़ा अधुरासा लगता है।
भीड के बीच भी थोड़ा अकेलासा लगता है।
यहीं करना बसेरा, तो थोड़ी रौनक रहे।
मिलेंगे तो नहीं, पर दिल को सुकून मिलता रहे!
-योगेश गोसावी
४ जनवरी, २०१९
आजकल मुझे तू रब सा लगने लगा है।
मिलेगा कुछ भी नहीं, फिर भी मेरी हर दुआ कबूल जो कर रहा है।
-योगेश गोसावी
४ जनवरी, २०१९
आजकल उनको हमारी बातें कुछ भी लगने लगी है।
लगता है हमारी भी जिंदगी अब आम होने लगी है।
-योगेश गोसावी
४ जनवरी, २०१९
खयाल है वो, जो सामने आता ही नहीं,
कितनी भी शिद्दत करु, रूबरू होता ही नहीं।
जिंदगी भी ऐसे मकाम पे आ रही हैं,
दिल की दिमाग पे हुकूमत चलती ही नहीं।
-योगेश गोसावी
७ जनवरी, २०२०
भूल जाता, पर गम तू कभी था नहीं,
याद रखता, पर कभी तू भुला ही नहीं।
पास बुलाता, पर सामने था ही नहीँ,
दूर जाता, पर तूने दामन छोड़ा ही नहीं।
-योगेश गोसावी
७ जनवरी, २०२०
जिंदगी तू भी किसी हसिनासे कम कहाँ,
थोड़ा समझने लगू, बदल देती है नूर अपना!
-योगेश गोसावी
८ जनवरी, २०२०
वो केहते है दिन भी ऐसे आयेंगे,
खुशी और सुकूनसे कुछ पल बितायेंगे।
हम है, आप हो, आज है, यहां है।
चलो, थोड़ा इन सबको ही हसीन बनायें।
-योगेश गोसावी
९ जनवरी, २०२०
अरसा होगया पेहला वेहला प्यार होके।
अरसा होगया पेहला वेहला प्यार होके।
अब जाके दूसरा होगया है।
कमाल तो देख कम्बख्त, वो भी तुझसे ही होगया है।
-योगेश गोसावी
१० जनवरी, २०२०
मांग कर लेने की आदतसे परेशान हो गया हूँ।
कुछ तो मांग ये रब, देके तुझे वो, मैं थोड़ा तुझसा बनना चाहता हूँ।
-योगेश गोसावी
११ जनवरी, २०२०
हां हूँ मैं आढा तेढा, किसी भी बात पे सटक जाता हूँ।
पर दिल का साफ हूँ, इसीलिये बहुतोंका खास हूँ।
-योगेश गोसावी
११ जनवरी, २०२०
मुश्किल है थोड़ा मेरी बातें समझना,
आसान जो होती, तो सबको हासिल होते!
-योगेश गोसावी
११ जनवरी, २०२०
जुस्तजू थी सुकुने मकाम की, कभी पूरी न हुई।
मिले थे एकबार राह में उसे, फिर मिलने की उम्मीद ना रही।
-योगेश गोसावी
१३ जनवरी, २०२०
उम्मीद तो थी, एकबार पलटकर देखते वो।
पर हम अतित थे, और ध्यान उनका कल पे था।
-योगेश गोसावी
१३ जनवरी, २०१९
मुस्कुराकर वो गम बाटते फिरते है इस तरह,
लेनेवाला हँसता है, न मिलनेवाला भी तरसता है।
-योगेश गोसावी
१५ जनवरी, २०२०
ले चलो मुझे साकी कुछ देर अपने साथ, थोडा तो बेहकने दो!
दायरों में चलनेवाले इस इन्सान को थोड़ी तो जन्नत देखने दो!
-योगेश गोसावी
१६ जनवरी, २०२०
आस थी एक लफ्ज की, वो भी ना मिल पाया।
पढ के हमारी जिंदगी, चुपचाप वो आगे बढ आया।
-योगेश गोसावी
१६ जनवरी, २०२०
सुन के उनकी हर एक बात, हम सब मान गये।
क्यों मानी हर बात केहकर वो खफा हो बैठे।
-योगेश गोसावी
१९ जनवरी, २०२०
थोडीसीही आग थी, धुयें ने सारा मंजर ढक दिया।
छोटीसीही खुशी थी, हमने जिंदगी को गुलजार कर लिया।
-योगेश गोसावी
२१ जनवरी, २०२०
कोई दरवाजा ना खुले तो मायूस न हो,
शायद सोनेवाला आपके सपनों में मदहोश हो!
-योगेश गोसावी
२२ जनवरी, २०२०
गुनाह ही करना है तो कुछ ऐसा करो,
अरसों बाद याद आये तो चेहरे पे मुस्कुराहट हो।
-योगेश गोसावी
२७ जनवरी, २०२०
ये जिंदगी तुझे जीते जिताते हर दिन देखा हमनें।
पता नहीं रातों से क्या दुश्मनी थी, जो सो कर गुजारी हमनें।
-योगेश गोसावी
२९ जनवरी, २०२०
यूँही राह देख रहे थे, कि बुलावा कब आये।
जिंदगी आये या मौत, जरा ढंगसे उसे गले तो लगाये।
-योगेश गोसावी
२९ जनवरी, २०२०
ये रात हौले हौले आगे सरकती है,
ना जाने किस किस को कौन कौन से ख्वाब दिखाती है।
और एक मैं हूँ, जो इसके अंधेरे से प्यार कर बैठा।
ना तो कोई ख्वाब देखा और ना ही कोई टूटा।
-योगेश गोसावी
३० जनवरी, २०२०
चाहे जो भी जितनाभी मिले, पूरा नहीं लगता।
होके उनसे जुदा, कुछ अच्छा नहीं लगता।
-योगेश गोसावी
१ फरवरी, २०२०
घडीया फिर वही वक्त दिखा रही है,
जुदा होने की याद फिर दिल दुखा रही है।
वैसे कल ये फिर हसाएंगी,
मिलने की याद फिर दिलायेंगी।
-योगेश गोसावी
३ फरवरी, २०२०
लिख दूँ कुछ भी किसी के बारे में,
उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता।
जुगनू हूँ मैं टिमटिमाता,
ऊजालों में नहीं दिखता।
-योगेश गोसावी
३ फरवरी, २०२०
कुछ ख्वाब हैं आसमां पे रखे, जिन्हें उतारना नामुम्किन है।
और एक दिल हैं, आस लगाये बैठा है उतार लाये उसे कोई कहीं से।
-योगेश गोसावी
४ फरवरी, २०२०
फिर आज वो सपना दिखा, जो न कभी हकीकत बनेगा।
हकीकत को देख शायद वही सपना जिंदगी गुलजार करेगा!
-योगेश गोसावी
५ फरवरी, २०२०
उम्मीदें नही रखना कभी, खुश रहोगे सदा बताते है सभी।
और ये कम्बख्त दिल है कि किसी की सुनताही नही।
-योगेश गोसावी
७ फरवरी, २०२०
मिज़ाज ये अंदाज हमारा क्या बताये,
राजाओं के सामने भी झुकते नहीं और भिकरियोंसे भी मांगने में हिचकिचाते नहीं!
-योगेश गोसावी
८ फरवरी, २०२०
गुलिस्ताँ तो हमारा फूलोंसे हमेशा आबाद है।
पर दिल से चुनने कहों तो दो चार फूल ही चुनपातें है।
-योगेश गोसावी
८ फरवरी, २०२०
गुस्सा मेरा याद कर आजकल वो मुस्कुरातें है।
कुछ कमीने दोस्त मेरे ऐसे भी प्यार जताते है।
-योगेश गोसावी
९ फरवरी, २०२०
युहीं चले गये ख़ामोशीसे वो, शायद फिर दिल दुखाया हमने।
या फिर खुद को आज और सुलगनेसे बचाया हमने?
-योगेश गोसावी
१० फरवरी, २०२०
गुस्सा हो या प्यार हो, फुरसतसे होना चाहिये।
वजह ढूंढने तक का तो वक्त मिलना चाहिये।
-योगेश गोसावी
११ फरवरी, २०२०
एहसासों से निकलके कुछ ख्वाब हकीकत में आ गये,
और फिर उन्हें सामने पाकर हम ही सहम गये।
-योगेश गोसावी
१४ फरवरी, २०२०
कुछ बातें बताता हूँ मैं आपको, आप ही के लिये,
परेशान करना होता, तो बातें ही ना करता किसी के लिये!
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
कुछ अनकही बातें, कोई बतादे तो जरा,
कुछ उलझी हुई बातें, कोई सुलझादे तो जरा।
कब तक यूँ अंधेरोमे चलते रहे हम,
हकीकत की रोशनी कोई दिलादे तो जरा।
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
इंतजार रहेगा अब तेरे बुलावे का,
खुदसे न कहीं जाना होगा।
ये तो बता जिंदगी, अब खुद से आना कहाँ होगा?
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
कोई किसीका नहीं होता, ना वक्त किसीका होता है।
जिलो ये पल बस, जो साथ अपने चलता है।
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
किसको पता है, जाना है कहा और कबतक?
चाहा बस है इतना, दो कदम साथ चलो साथ हो जबतक।
चाहा बस है इतना, दो कदम साथ चलो साथ हो जबतक।
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
खुदा भी गर अब गवाही देने आयें, तुझे यकीन ना होगा।
वेहम के शिकार हो तुम, अब तुम्हें सुकून नसीब ना होगा।
-योगेश गोसावी
१५ फरवरी, २०२०
कुछ तो पुराना रिश्ता है आपका हमसे,
वरना कौन आता है अनजान शहर को जानने!
-योगेश गोसावी
२३ फरवरी, २०२०
कुछ तो पुराना रिश्ता है आपसे हमारा!
वरना कौन आता है देखने अनजान शहर का नजारा!
-योगेश गोसावी
२३ फरवरी, २०२०
खुमार चायका आजकल कुछ इस कदर चढ रहा है,
जैसे अदरक मिलाके कोईं हमे जाम पिला रहा है।
-योगेश गोसावी
२८ फरवरी, २०२०
गुस्सा उनका आजकल हमें प्यार लगने लगा है।
ना बोलना उनका उसपे चार चाँद लगा रहा है।
-योगेश गोसावी
२ मार्च, २०२०
कुछ तो कयामत हुई होगी उसपार,
तभी तो ये रंग चढा है।
वरना कौन जाते जाते यूँ निखरते हुए जाता है।
-योगेश गोसावी
३ मार्च, २०२०
मौजूदगी का हमारा शायद उन्हें अब एहसास ना होगा।
जुगनू हूँ में टिमटिमाता उजालों में कैसे नजर आता।
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
उजालों में सितारों को याद करना शायद उनकी फ़ितरत में ना होगा।
पर होतेही रात उनको हमारा एहसास जरूर होगा।
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
झूट और सच सोचो तो एक माया है,
जिसको जो भाता है वही सच केहलाता है।
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
सोचा कि लिखना छोड़ दू, पर दिल मेरा माना नहीं।
बिन पढ़े बात समझना हर किसीको तो आता नहीं!
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
पसंद को मेरी पसंद करना ना करना आपकी पसंद है।
बिना कुछ ये सोचे उसको जारी रखना मेरी ही चाहत है।
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
गुनाह हो गया है खुद को बयाँ करना दिल से।
अपनी जरूरत के हिसाब से बोलने के दौर में।
-योगेश गोसावी
४ मार्च, २०२०
एक सडक ही थी बिच में, कुछ ज्यादा फासला न था।
तुम इस पार आनेतक खोनेका डर मेरी जान ले रहा था।
-योगेश गोसावी
७ मार्च, २०२०
कुछ वादों को निभाना अच्छा नहीं लगता।
कुछ बातों को नजरअंदाज करना अच्छा नही लगता।
कैसी ये रीत है, कैसे ये कायदे है, है तो सब अच्छे के लिये।
पर पता नहीं कुछ अच्छाइयों के लिये कुछ बातों को छोड़ना अच्छा नहीं लगता।
-योगेश गोसावी
७ मार्च, २०२०
पसंद है नहीं कुछ लोगों को हमारी कलाकारी, कुछ खराब तो नहीं है ये।
इतना ही है बतलाते की, उनके दिल को जाने का रास्ता नहीं है ये।
-योगेश गोसावी
७ मार्च, २०२०
खयाल मेरे, आजकल शायद उन्हें चुभते है,
अब कौन उन्हें समझायें, वो खुद वहीं रेहते है।
-योगेश गोसावी
८ मार्च, २०२०
कुछ तो गलत कर रहे हैं हम, इसिलिये तो डरा रहा हैं वो।
संभल जाओ प्यारो, वरना जन्म देकर किसीको मार भी रहा हैं वो!
-योगेश गोसावी
१६ मार्च, २०२०
ना तो मैं कोई शायर हूँ, ना ही कोई कवी हूँ।
दिल की बातें दिल में रखनेका ढक्कन बस भूल गया हूँ।
-योगेश गोसावी
१६ मार्च, २०२०
बोलना है तो दिल खोल के बोलो,
आधा अधूरा रखना क्यों!
रेह गर रहा है कुछ आधा अधूरा,
तो ऐसे रिश्तों को निभाना क्यों?
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२०
कुछ तो अहम बात होगी जो मुलाकात ना हुई।
या फिर हमारी अहमियत ही होगी जो अभी तक ना हुई।
-योगेश गोसावी
१८ मार्च, २०२०
अहमियत को किसीकी और कितना बढ़ाओगे?
थोड़ा तो रुक जा दोस्त और कितना पछताओगे।
-योगेश गोसावी
२० मार्च, २०२०
मुसाफ़िर हि था वो, तुमने हमसफर समझा।
चार दिन की चांदनी को, तुमने ही सूरज समझा!
-योगेश गोसावी
२० मार्च, २०२०
बातोंसे मेरी, अब मैं ही परेशां रेहता हूँ।
कोई अपनी भी सुनाये, ये दुआ करते रेहता हूँ।
-योगेश गोसावी
२१ मार्च, २०२०
कुछ चिजोंका मतलब आज समझ आया,
थाली बजानेसे बढ़ता है हौसला ये जान पाया!
-योगेश गोसावी
२२ मार्च, २०२०
कुछ तो हौसला दे जिंदगी की तू अभी बाकी है।
दिन चल रहे है खराब, पर मुस्कान अब भी बाकी है।
-योगेश गोसावी
२२ मार्च, २०२०
बातोंको मेरी सुनने, कोई पत्थर भी चल जाता।
वो भी चौक उठा, बोला मैं कैसे जवाब दे पाता?
-योगेश गोसावी
२३ मार्च, २०२०
खटखटाने दरवाजा अब ना जायेंगे हम।
आवाज देकर भी उन्हें देर लगती है हरदम।
-योगेश गोसावी
२३ मार्च, २०२०
गर लिया मैंने धनुष्य हात में तो न बचेगा रावण!
मन से निकालो भय तुम अपने करो और ना कोई जतन!
-योगेश गोसावी
२ अप्रैल, २०२०
एक खयाल आया था तुम्हारा अभी अभी,
उसे समेटना भी था किसी कागज पे।
ये हो न पाया उसमें ही मेरे खोने के कारण,
एक और जेवर तुम्हें दिलाते दिलाते रेह गया मैं!
-योगेश गोसावी
३ अप्रैल, २०२०
हाल गर हो पता अपनोंका, तो थोड़ा सुकून मिल जाता है।
रोजमर्रा की जिंदगीमें थोड़ा दिल बेहल जाता है।
-योगेश गोसावी
३ अप्रैल, २०२०
फिर आयी थी कुछ बातें जेहन में, उन्हें उतारने कागज ना मिला।
मुक्कमल होने ही वालें थे कुछ ख्वाब, पर उन्हें नींद का सहारा ना मिला।
-योगेश गोसावी
३ अप्रैल, २०२०
शक हम करेंगे, बेशक करेंगे।
तुझपे नहीं, दुनिया की समझ पे करेंगे!
-योगेश गोसावी
४ अप्रैल, २०२०
नींद भी अब थोड़ी बेईमानसी हो गयी है।
रातभर हमें जागता छोड़, उन्हें दिन में भी आती है।
-योगेश गोसावी
४ अप्रैल, २०२०
गुजर ही रही है जिंदगी, कुछ भी तो बदला नहीं।
बस परिंदोने छोड़े है घोसले, हम है घर में यहीं।
-योगेश गोसावी
४ अप्रैल, २०२०
आओ आज दियों को थोड़ा अंधेरा दिखादे!
दे सकते है हमे वो रोशनी, जरा फिरसे उनको बतादे!
-योगेश गोसावी
५ अप्रैल, २०२०
कोई भूल ना जायें हमें, इसलिये बेवजह बातें करते है।
वहीं जज़्बात रहें मिलनेपर, बस यही फरियाद करते है।
-योगेश गोसावी
८ अप्रैल, २०२०
ख़ामोशियोंका दौर आया है, दोस्तों थोड़ा संभल के रेहना!
बेवजह ही सही, बातों से एक दूसरे से जुड़े रहना!
-योगेश गोसावी
९ अप्रैल, २०२०
संभाल के रखना दिल ये मेरे दोस्त, बड़ा बदमाश होता है।
रहता तेरे सीने में है, पर धड़कता कहीं और है।
-योगेश गोसावी
९ अप्रैल, २०२०
खिलखिलाती ये गलियाँ, वीरान सी हो गई है।
ख़ामोशियोंकी एक लेहरसी आयी है।
ऐसी गलतफहमीयोंमे ना रेहना मेरे दोस्त।
ध्यान से सुन, कुदरत हमसे कुछ बोल रही है।
-योगेश गोसावी
९ अप्रैल, २०२०
लेंगे उतनाही जितना दे पायेंगे,
खयाल उनका ये दुरुस्त ही था।
हमने हसके बोल भी दिया,
प्यार की दुनिया में बेमतलब ही था।
-योगेश गोसावी
११ अप्रैल, २०२०
मुस्कुरायें थे वो हमपे, कुछ अलग सोच कर।
हम भी मुस्कुरायें मन में, कुछ अलग ठान कर।
-योगेश गोसावी
१३ अप्रैल, २०२०
एक तूफान आया था, वो भी मुसकूरातें हुये।
जादा कुछ नहीं, आँखों की धूल उड़ा ले गया!
-योगेश गोसावी
१३ अप्रैल, २०२०
मुलाकातों का वक्त आ रहा है, औरों की बातें अब शुरू होनी है।
तुम बस उन्हें याद रखना, जिनकी बातें ईन दिनों को मेहका रही है।
-योगेश गोसावी
१७ अप्रैल, २०२०
बेजुबाँ हो जायेंगे वो चेहरे, जो ईस लॉकडाउन में बोले ही जा रहें थे।
करेंगे वो अब याद तुम्हें, जो अब तक कुछ बोल ना पायें थे।
-योगेश गोसावी
१८ अप्रैल, २०२०
तुम हो पास मेरे, शायद इसिलीये और भी आते है।
क्या हैं मुझमें खास, जानना ये चाहते है।
-योगेश गोसावी
१९ अप्रैल, २०२०
थोड़ा सोचा क्या उनके बारें, कुछ लोग खुदा बन बैठें।
खुदा ही की रहमत है, हम जैसे क़दरदाऩ उनको दे बैठे।
-योगेश गोसावी
२२ अप्रैल, २०२०
एक हम ही है शायद, जो बिना वजह खुश रहते है।
लोग तो अपनी कामयाबी के बावजूद भी, रोते हुये ही दिखते है।
-योगेश गोसावी
२२ अप्रैल, २०२०
रूठना ही हैं, तो वजह भी थोड़ी अच्छी होनी चाहिये।
शायद अब बेवज़ह मनाने का इल्म, हमे भी सीखना चाहिये।
-योगेश गोसावी
२२ अप्रैल, २०२०
पढ़ लेता हूँ मैं कभी अपनी ही लिखावट,
और वाह भी कर देता हूँ।
किसी और कि जरूरत न लगे मेरी खुशी को, बस इसिकी तैयारियां करता हूँ।
-योगेश गोसावी
२३ अप्रैल, २०२०
नजरअंदाज करने का थोड़ा हुनर हमे भी सीखा दो।
खुश रेहने की ये तरकीब थोड़ी हमे भी आजमाने दो।
-योगेश गोसावी
२३ अप्रैल, २०२०
संभाल के रखिये अपने कुछ हुनर अपने पास ही।
ज़ाहिर होते ही क़ीमत खो देते वो बस पल में युहीं।
-योगेश गोसावी
२४ अप्रैल, २०२०
बुरा कोई नहीं होता दोस्त, फिर भी बदलना पड़ता है।
हो जाये और थोड़ा अच्छा, इसलिए तैयार होना होता है।
-योगेश गोसावी
२५ अप्रैल, २०२०
बदलना है खुद को खुद के लिये, आसान है मेरे दोस्त!
बदलने है तेरे बारे में किसीके खयालात, कयामत है मेरे दोस्त!
-योगेश गोसावी
२५ अप्रैल, २०२०
मिला है प्यार सबसे इतना कि, जीने की चाह ना रहीं।
पर ये कमबख्त जिंदगी की चाहत, सब कुछ पाकर भी छूट ना रहीं।
-योगेश गोसावी
२५ अप्रैल, २०२०
बंधन या सलाह, किसी को लगती है रुकावट,
और किसी बेगाने को प्यार की लिखावट!
-योगेश गोसावी
२७ अप्रैल, २०२०
बहुतोंको जीना है बेखौफ और आझाद।
उनको एहसास नहीं, करने पड़ते है सौदे वक्त से बेहिसाब!
-योगेश गोसावी
२८ अप्रैल, २०२०
ना करना तुम कोई जतन उनसे यूँ मिलनेका!
वक्त है अपनोंके साथ देश को भी बचानेका!
-योगेश गोसावी
२८ अप्रैल, २०२०
अकेलेपन का नशा थोड़ा और बढ़ता हुआ!
मिलने की खुमारी को थोड़ा और बढाता हुआ!
-योगेश गोसावी
२८ अप्रैल, २०२०
जादा कुछ भी हो, समय के चलते जहर ही लगता है।
दोस्ती हो, दुश्मनी हो, या हो प्यार, थोड़ा हिसाब में रहे वही अच्छा लगता है।
-योगेश गोसावी
२९ अप्रैल, २०२०
माँग के मांगी तो भी क्या जुदाई मांगली,
उम्रभर जो सहनी हैं वही आज एक दिन के लिये मांगली।
-योगेश गोसावी
२९ अप्रैल, २०२०
अंधेरा है घना छा रहा, दिल दिमाग को भी है चपेट में ले रहा।
पर तुम ना भयभीत होना, आशा का एक दीपक भी इसको दे सकता है मात भला।
-योगेश गोसावी
२९ अप्रैल, २०२०
जान जो कभी हमारी तुम माँगते, कभी दे ना पाते।
उसीकी चीज उसे ही तोहफा कभी नही देते।
-योगेश गोसावी
३० अप्रैल, २०२०
हर ढलता दिन पहले थोड़ा रुलाता था, बताता था एक और दिन कम हुआ मेरे हिस्सेका!
अब वही दिन खुशी देकर जाता है, बताता है थोड़ी कम दूरी पे है सिक्का खुशी का!
-योगेश गोसावी
३० अप्रैल, २०२०
थाम लो या मिन्नते करो, ना पलट के आता है, ना ही वो रुकता है।
ये जाने किसका आशिक है, बस चलते ही जाता है।
थोड़ा सोचा भी था कि कुछ पता करु, पर एक पल के लिये भी ये वक्त कहा रुकता है।
-योगेश गोसावी
५ मई, २०२०
यूँ तो ना मज़िलोंकी कमी है और ना ही रास्तों की।
पर ये दिल ही है कि जो यहां से निकलता ही नहीं।
-योगेश गोसावी
१२ मई, २०२०
दिल को यूँ बचाये रखना हमें कभी आया नहीं,
और दिल खोल के जीना तुम्हारी फितरत नहीं।
शायद यहीं वजह है उसने हमें मिलाया,
वरना ईस सफर में मजा आता ही नहीं।
-योगेश गोसावी
१३ मई, २०२०
हुस्न देखकर आशिकी करनेवाले ने, खयालात जानकर फुरकत करली।
वो बेचारी भी उसको सच मानकर आगे बढ चली।
-योगेश गोसावी
१५ मई, २०२०
मंझिल क्या है इसका हमें कभी डर न था।
सफर खूबसूरत हो बस यहीं अरमान था।
-योगेश गोसावी
१५ मई, २०२०
अंधेरा और घना हो रहा है, उजाले की यादें भी धुंधली हो रही है।
बस एक हलकी सी रोशनी है उन आंखों में, जो अब भी लडने को कह रही है।
-योगेश गोसावी
१५ मई, २०२०
गुजर रहा था कारवाँ अँधेरों में बिना किसी रुकावट के।
शायद आशाओं की किरणें उजागर कर रही थी उनकी राहें।
-योगेश गोसावी
१७ मई, २०२०
इल्जाम कोई गैर करें तो कोई शिकवा नहीं,
उन्हें समझाने की कोई जरूरत नहीं।
वहीं अगर अपने कुछ कहे तो?
फिर शायद औकाद हमारी कुछ बची नहीं।
-योगेश गोसावी
१८ मई, २०२०
ना कुछ बोल कर लोग बहुत कुछ बतलाते है।
हम युहीं अपनी जबान चलाते रह जाते है।
ना कुछ सोचकर लोग आसानी से बोलते है।
हम है जो सोचकरभी बोल ना पाते है।
-योगेश गोसावी
१८ मई, २०२०
कारवां गुजर गया मेरे शहरसे, बेनकाब हो गया जैसे।
गेहने अपने उतार, नहाकर आयी हो वो जैसे!
-योगेश गोसावी
२१ मई, २०२०
कुछ तो है बात बातों में, बिना मिले ही मिलाती है।
हो कोई कितने भी पास या दूर, अपनेपन का एहसास दिलाती है।
-योगेश गोसावी
२२ मई, २०२०
कमबख्त ये नींद हमेशा मेरी उलझनें क्यूँ बढ़ाती है?
जब बातें करनी होती है, उन्हें आके मिल जाती है।
-योगेश गोसावी
२३ मई, २०२०
नजरअंदाज करो मुझे, कोई गिला नहीं।
पर नहीं मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ छोड़ गये वहीं।
दिल बड़ा है अपना, पर इतना भी नहीं,
की अहमियत दो हमें तभी, जब जरूरत हो कहीं।
-योगेश गोसावी
२३ मई, २०२०
पहला अंदाज आपका बन जाती है पहचान आपकी।
फिर कितनी कोशिश करो न बन पाती है नयी तसवीर आपकी!
-योगेश गोसावी
२३ मई, २०२०
गुस्सा या नाराजगी से बात नहीं बनती ये समझाना पड़ता है।
ये समझाने के लिये हरबार गुस्सा और नाराजगी छोड़नी पड़ती है।
-योगेश गोसावी
२४ मई, २०२०
थोड़ा छूट रहा है, थोड़ा संभल रहा है।
मेरे शहरसे उसका कारवां गुजर रहा है।
-योगेश गोसावी
२४ मई, २०२०
कुछ तो होगी बात, तभी तो लोग मिलते है।
दुख दर्द हो या खुशी, मुझसे आके बाटते है।
फिर भी मैं तेरा हूँ ये यकीन कैसे दिलाऊ?
दुनिया जानती है जो बात, उसे कौनसे तरीकेसे दोहराऊं?
-योगेश गोसावी
२५ मई, २०२०
वजह तो कुछ भी नहीं बात करने की!
पर पता नहीं बेवजह की बातें क्यूँ अच्छी लगती है।
-योगेश गोसावी
२६ मई, २०२०
जरूरत से ज्यादा जो हो वही जहर बनता है,
जिसको जरूरत पता ना हो, वो ही शैतान कहलाता है।
-योगेश गोसावी
२९ मई, २०२०
जरूरत ना रहीं तो बातभी ना कि हमसे।
गर होती तो प्यार भी हो जाता था हमसे।
-योगेश गोसावी
३० मई, २०२०
समझ आया कितना छोटा हूँ मैं,
खुले आसमां के नीचे सोया हूँ मैं।
रात भी अंधेरे में सब कुछ छुपा रही है,
पर ये चांदनी जेहन को जगमगा रही हैं।
-योगेश गोसावी
३० मई, २०२०
यादों के खजाने में और एक दिन शामिल हुआ।
कल फिर कुछ ख़्वाबों के पन्ने खोलकर बैठा हुआ।
-योगेश गोसावी
३० मई, २०२०
सामनेवाला पहचान लेता है नियत हमारी।
जो भी करनी है बात, दिल की होनी चाहिये तैयारी!
-योगेश गोसावी
३० मई, २०२०
एहमियत कम हो जाती है अपनी,
जब हम चुनौती नही रहते।
संभाल के रखिये अपनी अकड़ को,
आसानी से मिलने वालों के खरीदार नहीं होते।
-योगेश गोसावी
३१ मई, २०२०
सबकी कोशिशें है तुझे खुश रखने की,
तरीके पसंद ना आये तो नाराज ना होना।
सब ही है तेरे अपने, छोटीसी बात में पराया ना समझना!
-योगेश गोसावी
१ जून, २०२०
कुछ यादें थी पुरानी, जो साथ बैठ दोहरानी थी।
पर अब हम पे कहाँ वक्त और उनकी मेहरबानी थी।
-योगेश गोसावी
२ जून, २०२०
बदला है रुख हवाओं ने अचानक,
लगता है कोई तूफान आनेवाला है।
धूप में झुलसते मेरे शहर को बचाने,
छाँव लेके कोई बादल आनेवाला है।
-योगेश गोसावी
३ जून, २०२०
आयी थी आधीयां, इम्तिहां लेने,
बरसता कौन है जादा ये देखने।
एक बूंद भी न देखी आखों में,
मुस्कराकर उलटे पाव चल दिये।
-योगेश गोसावी
३ जून, २०२०
या
डर क्या और द्विधा क्या, सब हैं मन का खेल।
ईन सब से निपटना है मेरे बायें हात का खेल।
-योगेश गोसावी
४ जून, २०२०
कुछ तो गड़बड़ है दिमाग में,
छोटीसी बातों पर भी बिगड़ता है।
जब बात खुद की हो, सन्मान की हो,
तो समझौता भी समझता नहीं है।
-योगेश गोसावी
४ जून, २०२०
कुछ जगहों की अपनी अलग ही कुछ यादें होती है।
फिर कोई मिले ना मिले वहाँ, पर सुकून जरूर दिलाती है।
-योगेश गोसावी
४ जून, २०२०
टुकडा था जिसका उसीकी परछाई में आया था।
जाने क्यूँ लोग कह रहे थे उसको ग्रहण लग गया था।
-योगेश गोसावी
६ जून, २०२०
ईश्क है तुमसे, पर जिस्मानी तो नहीं।
कद्र करना किसीकी क्या ईश्क से कम नहीं?
-योगेश गोसावी
७ जून, २०२०
नज्म तो नाम है ईलाज का, उसका जख्म से क्या रिश्ता?
वो देता है तभी आती है, उसका जख्म से क्या वास्ता?
-योगेश गोसावी
९ जून, २०२०
डर भी आखिर हमें कबतक डराये,
कुछ पल के लिये ही सही हम खुद को आजमाएं।
-योगेश गोसावी
१० जून, २०२०
दाग है मुझपे कई, रहता भी हूँ अकेला।
फिर भी काफिला है मेरा चाहनेवालों का।
वो तो अपना अलग अंदाज है जीने का,
खुश रहता हूँ भीड़ से दूर लेके झोला फ़क़ीर का।
-योगेश गोसावी
११ जून, २०२०
यादें हसा भी रही है, रुला भी रही है।
घर बैठे बैठे दुनिया घुमा रही है।
-योगेश गोसावी
१४ जून, २०२०
आती है क्या तुम्हें याद मेरे शहर की?
गर आती है तो ये तेरा भी है।
जन्म तेरा कहीं का भी हो,
पर धड़कन तेरी यही की है।
-योगेश गोसावी
१६ जून, २०२०
कोई थोड़ा चौंक जाएगा, किसी को बुरा लगेगा।
पर खुद को अब बदलने में बड़ा मजा आएगा।
-योगेश गोसावी
१९ जून, २०२०
पता है सब सोये होंगे, रात है, रिवाज भी है।
पर मुझे ये गवारा नहीं।
मैं जी रहा हूँ फिर वो पल जिसे भूलना आता नहीं।
-योगेश गोसावी
२० जून, २०२०
लोग पूछते है, कैसे कर लेते हो ये सब?
जिसका खुद पता नहीं, उससे पता पूछते है सब।
-योगेश गोसावी
२० जून, २०२०
जी भर के जी लिया होता, तो ये आफत ना आती।
खुद ही के घर में कैद सा लगने लगे, ये नौबत ना होती।
-योगेश गोसावी
२० जून, २०२०
छोटीसी ही बात है, पर बने बनाये रिश्ते भी तोड़ती है।
जब लापरवाही हमारी, उनको बेपरवाही लगती है।
-योगेश गोसावी
२० जून, २०२०
काला था चाँद जो आज मैंने देेखा,
एक अनहोनी को होते हुए देखा!
-योगेश गोसावी
२१ जून, २०२०
जिंदगी ही है, कम ज्यादा ही देगी।
दुकान थोड़ी ना है, जो नापतोल के देगी।
जितना हिस्सा मिले, बस वही अपना है।
जो ना मिले, उसीके लिये तैयार होना है।
-योगेश गोसावी
२२ जून, २०२०
हमसफर ना हो कोई, तो भी कोई शिकायत नहीं।
बस रास्ता मुझे पसंद आये, यही दुआ हैं मेरी।
-योगेश गोसावी
२६ जून, २०२०
दो कदम चला, एहसास हुआ, और किसीने कदम उठाया ही नहीं।
पर अब क्या? रुकना मुझे भी तो किसीने सिखाया नहीं!
-योगेश गोसावी
२६ जून, २०२०
घाव थोडा गहरा दिया, तो मरहम उसीसे माँग लिया।
वक्त देकर उसने, काम और आसान कर दिया।
-योगेश गोसावी
२८ जून, २०२०
एक पल ही सही, मैं चमक जाऊंगा।
जिंदगी भर ना भूल पाओगे, कुछ ऐसा काम कर जाऊँगा।
-योगेश गोसावी
२९ जून, २०२०
बोला उन्होंने कुछ, पूरा सुना तो नहीं।
दिल दुखा है, बस पता है यहीं।
छोटीसी ही कहानी है, किरदार कई सारे।
देखें कब तक निभा सके, भूल रिवाज़ सारे।
-योगेश गोसावी
१ जूलाई, २०२०
मौजूदा हालात कुछ बुरे तो नहीं,
कुछ यादें है, बस सताती है वही।
वरना आज भी तो कुछ कमी नहीं।
-योगेश गोसावी
१ जूलाई, २०२०
सब है मुझे पसंद, जो करता हूँ और जो करता भी नहीं।
जिंदा हूँ आज, यही बात काफी है।
ना कुछ कर पाऊँ ईसके लिये अभी गुजरा तो नहीं।
-योगेश गोसावी
१ जूलाई, २०२०
एक अरसा हुआ, कुछ ना लिख पाया।
आज बरसा जो बादल, वो भी कुछ खयाल ना दे पाया।
-योगेश गोसावी
५ जूलाई, २०२०
ना चाँद है, ना चांदनी है पर फिर भी रात सुहानी है।
ना दोस्त है, ना हमदम है पर मन में बज रहा सितार है।
ना जाने कौनसा ये वक्त है, ना जाने कौन ये घड़ी है।
दिल फिर भी खुशनुमा है, शायद वजह ये हलकी बरसात है।
-योगेश गोसावी
१० जूलाई, २०२०
गुजर रहा था वो बादल, बिना बरसे मेरे शहर।
शायद ढूंढ रहा था जगह, अपनी पसंद की।
पता नही क्यूँ वो मुझे मुझसा लगा।
मैं भी नहीं बरसता हर किसीके सामने अभी।
-योगेश गोसावी
११ जूलाई, २०२०
दूर एक बाल्कनी में कुछ धुंए सा दिखा,
पता नहीं कोई क्या जला रहा था।
या शायद सिगरेट के कश में अपनी यादें सुलगा रहा था।
-योगेश गोसावी
११ जूलाई, २०२०
बात करो, या ना करो, मिलो, या ना मिलो।
कोई किसी के बिना यहाँ मरता तो नहीं।
पर एक सच ये भी है,
दिल का वो कोना, किसी और को मिलता भी नहीं।
-योगेश गोसावी
१४ जूलाई, २०२०
तय किया था आज, फिर भी ना हो पाया।
राह देखने से तेरी, आज फिर उसको रोक ना पाया।
पता है जरूरी नहीं ये सब, फिर भी होता है।
युहीं नहीं ईस दिल को बेचारा कहाँ जाता है।
-योगेश गोसावी
१५ जूलाई, २०२०
छोड़ दो उम्मीदें मुझसे जब उसने ये कहाँ,
मायूसी की एक लहर दौड़ी आयी यहाँ।
जब छोड़ ही दी उम्मीदों की वो दुनिया,
जानें कहाँ से आयी ये खुशियों की लड़ियाँ।
-योगेश गोसावी
१६ जूलाई, २०२०
क्या हुआ जो आज मंदिर बंद है,
मेरी उम्मीदों का दिया आज वही जल रहा है।
किसको पता कल कैसा आनेवाला है,
पर ख्वाहिशों को जिंदा रखने में क्या हर्ज है।
-योगेश गोसावी
१७ जूलाई, २०२०
अँधियारा हो घना तभी मेरी अहमियत समझोगे।
दिन में नहीं, रात में मुझे चाहोगे।
हूँ मैं कितना भी छोटा, रोशन करूँगा रात को,
तभी तो चैन से देखोगे आते हुयें उजाले को।
-योगेश गोसावी
२० जुलाई, २०२०
हकीकत में ना सही तेरे अफ़सानें में जिक्र हमारा होगा।
जिंदगी के आखरी वक्त आँखें नम करने वाला पन्ना वहीं होगा।
-योगेश गोसावी
२० जुलाई, २०२०
जाना तो सबको है, पता है हमें।
पर यूँ नहीं दोस्त, ऐसे सफर अधूरा छोड़के।
क्यूँ चल दिये इतने जल्दी, जिंदगी का कड़वा सच बतलाक़े।
-योगेश गोसावी
२१ जुलाई, २०२०
गुफ्तगू की ये नई अदा रास आने लगी हैं।
कोई खुद पहल करे, तभी बात होनी हैं।
शायद कुछ असर अब हम पे होने लगा है।
खुद को खुद में समेटे रखना पसंद आने लगा है।
-योगेश गोसावी
२७ जुलाई, २०२०
आरंभ है ये अंत का, या अंत का आरंभ है?
मन में ये विचार लगा रहा एक द्वंद्व है।
कब तक चल रहा ये नाट्य अब देखना है।
क्या आयेंगे राम फिर एक बार करने संहार है?
-योगेश गोसावी
२९ जुलाई, २०२०
कुछ तो बात थी बचपन की, जब चाँद भी दौडता था साथ हमारे।
जवानी ने क्या पढा दिया ये, लगता है अकेले हम ही दौड़ रहे है सफर में हमारे।
-योगेश गोसावी
३१ जुलाई, २०२०
बोल देना कुछ कभी अच्छा होता है।
कर ना पाओगे कुछ ये पता ही था।
भूल जाना कुछ कभी अच्छा होता है,
पर याद भी कर लिया होता तो अच्छा था।
-योगेश गोसावी
३१ जुलाई, २०२०
कोई कुछ बोल ना पाया, कोई बस बोल ही गया।
किसीने एहसास दिलाया, यूँ सबने मुझे उलझाया।
-योगेश गोसावी
७ अगस्त, २०२०
पार्थ हूँ मैं इक्कीसवीं सदी का, हरदम संभ्रम में रहता हूँ।
सारथ्य करे मेरा कोई, उस कृष्ण की खोज में रहता हूँ।
-योगेश गोसावी
११ अगस्त, २०२०
दूर पहाड़ी पर मंदिर देखा और खयाल आया,
हर जगह होने वाले भगवान को दूर क्यूँ हैं बिठाया?
थोड़ा सोचा तो समझ आया, खुद को मिलना है, तो भीड़ से दूर अकेले चलना होता है।
-योगेश गोसावी
१२ अगस्त, २०२०
धुँधली होती यादें, कुछ इशारा कर रही है।
नयी लगी ये आदतें, कुछ इशारा कर रही है।
संभालो अपने आप को, शायद नयी शुरुआत होने जा रही है।
-योगेश गोसावी
१४ अगस्त, २०२०
हाथों में पकडा मोबाइल हजारों से जोडेगा तुम्हें।
उन हजारों में वो एक ना होगा, तो कोई ना भायेगा तुम्हें।
-योगेश गोसावी
१४ अगस्त, २०२०
लोग समझदार होते गये, हम गवार ही रह गये।
लोग दिमाग की सुनने लगे, हम दिल को ही पकड के बैठ गये।
-योगेश गोसावी
१८ अगस्त, २०२०
पलभर का साथ था, उसमें भी कितनी शर्ते लगी।
कोई गैर ना थे हम, समझने में ये उन्हें जिंदगी लगी।
-योगेश गोसावी
१८ अगस्त, २०२०
दीवानों सी हरकते हैं पर दीवाने तो नहीं।
जवानी सा आलम हैं पर उमर अब वो तो नहीं।
कुछ तो है अजब, जो ये सब करवाता है।
दिल एक बचा है शायद, जो कुछ सुनता नहीं।
-योगेश गोसावी
१८ अगस्त, २०२०
दिल खोल के जीना फितरत थी अहम।
दिल संभाल के जीना जरूरत है अभी!
वक्त बदल के रखता है हर एक वहम।
अपने भी कभी और परायें भी कभी!
-योगेश गोसावी
१९ अगस्त, २०२०
इंसान हूँ मैं, बदलता रहता हूँ।
तुमसे तुमसा पेश आता हूँ।
ना हो ये बात, तो आज मैं मैं हूँ।
इंसान होकर भी इंसानियत दिखाता हूँ।
-योगेश गोसावी
२१ अगस्त, २०२०
संभल जा ये दिल, तेरी अहमियत थोड़ी कम हो गयी।
अक्लमंदों की इस दुनिया में दिमाग की जरूरत ज्यादा बढ़ गयी।
-योगेश गोसावी
२४ अगस्त, २०२०
कल रात एक बादल उतरा मेरे शहर में।
ढूंढ रहा था किसीको, पर कोई मिला नहीं।
फूटफूट कर रोया इतना कि वो बचा ही नहीं।
सुबह लोग बोले, कल रात क्या तेज बरसात हुई।
-योगेश गोसावी
२५ अगस्त, २०२०
हल्की बूंदाबांदी सबको ही भाती है।
थोड़ीसी रुमानियत हवा में आती है।
पर मैं बावरा उलझन में रहता हूँ,
कौन और क्यों पूरा रो ना पाया सोचता हूँ।
-योगेश गोसावी
२५ अगस्त, २०२०
दौड़ हमने भी लगाई थी, कुछ महीनों में जिंदगी जीने की।
पर कुछ महीने हम से छीने गये, कुछ ख्वाब ख्वाब ही रह गये ।
-योगेश गोसावी
२५ अगस्त, २०२०
आरंभ है ये अंत का, या अंत ही आरंभ है।
है दुविधा में ये मन मेरा,
जीवन ही एक मरन है, या मरन ही नया जीवन है।
-योगेश गोसावी
२७ अगस्त, २०२०
कौन दिशा में है जाना,
कौन दिशासे होगा आना।
किस्मत का है ये खेल सारा,
बस, तेरा और मेरा है थोड़ा निराला।
-योगेश गोसावी
२९ अगस्त, २०२०
रूह से उसकी, मेरी रूह की थोड़ी आदते तो मिलती है।
पिता है वो मेरा, इसलिये तो हमारी थोड़ी बनती बिगड़ती है।
-योगेश गोसावी
२९ अगस्त, २०२०
शुरुआत होने जा रही है तेरी नयी,
बस अब हर बात दिल से ही करना।
चाहे बनाले तू कितने भी रिश्ते नये,
दोस्त सारे पुराने साथ में ही रखना।
-योगेश गोसावी
३० अगस्त, २०२०
दास्तानें इश्क बयां करने बैठा, पर एक लब्ज भी ना बोल पाया।
ढेर सारी खामोशी के बाद बस एक हलकी मुस्कान दे आया।
-योगेश गोसावी
२ सितंबर, २०२०
प्यार हो या हो नफरत, दोस्ती हो या दुश्मनी हो।
गुस्सा हो या हो मनाना, हसना हो या रोना हो।
चाहे जो भी हो, बस जुनून दोनों तरफ बराबर हो।
-योगेश गोसावी
३ सितंबर, २०२०
यूँ चाँद अकेला होता तो इतना मजा कहाँ आता,
दूर खडी चाँदनी ना होती तो ये आसमान मुक्कमल कैसे होता।
-योगेश गोसावी
३ सितंबर, २०२०
ढलते ढलते ये शाम कुछ रंगीन हो गयी।
हौले हौले पैर बढ़ाती रात की गहराइयों में खोने का हौसला दे चली।
-योगेश गोसावी
५ सितंबर, २०२०
खामोशियों से भरी सुनसान इस रात का आलम कुछ खुशनुमा हो जाता है।
जब यादों के घने बादलों से थोड़ी देर तू हमें देख लेता है।
-योगेश गोसावी
९ सितंबर, २०२०
एक बार किसी को दिल से मिलो, तो वो कहीं खो नहीं जाता।
जब भी मिलना हो उससे बस शिद्दत से अपने आप में ढूंढो, मिल ही है जाता।
-योगेश गोसावी
१० सितंबर, २०२०
रंगों की अहमियत पे तो मुझे कोई शक नहीं।
पर बता दो उनको जरा, सिर्फ उनसेही मेरी जिंदगी रंगीन नहीं।
-योगेश गोसावी
१० सितंबर, २०२०
ना जाने क्या हो जाता है जब पैर यहाँ मुडते है।
दिल थोड़ा तेज धड़कता और सांसे फूल जाती है।
कल की ओर भागती ये जिंदगी यकायक पिछे दौड़ लगाती है।
दिल थोड़ा जवान और जवानी फिर लौट आती है।
-योगेश गोसावी
१२ सितंबर, २०२०
खुशहाल मेरी जिंदगी देख उसका नसीब पे यकीन हो गया।
देखी होती असफलताएँ एवं प्रयास मेरे, खुशहाल वो भी बन गया होता।
-योगेश गोसावी
१७ सितंबर, २०२०
मैं अकेलाही खडा रहा अपनों की भीड़ में।
जबरदस्ती गले पड़ना मुझे गवारा न था।
रूठे मुझसे कई, मेरी बात न करने की आदतसे।
पर चाहा जिन्होंने मुझे, उन्हें पसंद ही मेरी ख़ामोशियां थी।
-योगेश गोसावी
१९ सितंबर, २०२०
अंधेरों में हमे अक्सर वहीं याद आते है,
जो दिये हमनें उजालों में भुलायें होते है।
-योगेश गोसावी
३० सितंबर, २०२०
मौसम बदल रहा है, हवायें थोड़ी और तेज चल रही है।
अपने साथ शायद कुछ यादें भी ले उड़ी है।
बताओ कोई उसे, घमंड न कर अपनी ताकद पर।
तू जाते जाते हमने थोड़ी और नयी बना ली है।
-योगेश गोसावी
६ अक्टूबर, २०२०
शहर मेरा लगता है फिर अंगडाई ले रहा है।
उड़ गये थे उन परिंदोंको फिर से समेट रहा है।
-योगेश गोसावी
१२ अक्टूबर, २०२०
बिजली कडक रही थी और कुछ यादें महक रही थी।
तेज होती बरसात इस दिल को और पिघला रही थी।
लोग बोल रहे थे, चार दिन तूफान यूँही चलेगा।
उन्हें क्या पता मैं अंदर समंदर समेटे बैठा था।
-योगेश गोसावी
१४ अक्टूबर, २०२०
रह गया है कुछ शायद, इसलिये रह-रहकर वापस आती है।
बारिश भी आजकल कुछ कुछ मुझसी पेश आती है।
-योगेश गोसावी
१४ अक्टूबर, २०२०
यादें होती ही है उस चाय की तरह योगी,
जो अकेली पी नहीं जाती, साथ कोई हो तो खूब है भाती।
-योगेश गोसावी
२० अक्टूबर, २०२०
ऑनलाइन का जमाना है योगी, मिलने की बात ना कर।
पसंद भी आये कुछ तो बोल मत, बस अंगूठा (लाईक) दिखाया कर।
-योगेश गोसावी
२० अक्टूबर, २०२०
अलग बैचेनी है माहौल में योगी, लगता है कोई तूफान आयेगा।
संभाल के रख वहम अपने, वरना सब उड़ा ले जायेगा।
-योगेश गोसावी
२१ अक्टूबर, २०२०
उठा तीर, लगा निशाना, कर भेद तू अंतिम सत्य का।
सत्य की होगी विजय, जब करेगा तू सामना धैर्यसे असत्य का।
-योगेश गोसावी
२५ अक्टूबर, २०२०
क्या ख्वाइशें है तुम्हारी, पूछा था उसने झल्लाकर कभी।
हमने भी मुस्कुराकर याद की, जो बोल कर भी नहीं कर पायें थी पूरी।
-योगेश गोसावी
२७ अक्टूबर, २०२०
खामोशियों को सुनने मेरी, तुम्हें दिल की जरूरत होगी।
मौजूदगी को मेरी देखने तुम्हें एहसास की जरूरत होगी।
गर हो ना यें कुछ भी तो बिलकूल मायूस ना होना।
जिंदगी जीने की ईसी तेरी अदा ने तुझे इन्सान बनाया होगा।
-योगेश गोसावी
१ नवंबर, २०२०
खयालों में जलायें थे जो दीप, उन्हें हकीकत की रोशनी ना मिलीं।
लौटे नहीं सरहद से जिनके दीप, उनके लिये अब दिवाली त्यौहार ना रहीं।
-योगेश गोसावी
१७ नवंबर, २०२०
तलाश तो सबकी जारी है अपने खालीपन को मिटाने की।
कोई दोस्ती का नाम देता है, तो कोई इश्क का।
पर चाह तो सबकी एक है।
ना गुजारा हो जिंदगी, बगैर किसी की साथ का।
-योगेश गोसावी
३ दिसंबर, २०२०
थोड़ा धैर्य रख और खुद से ही बात कर तू, आसपास शोर बहुत है।
सवेरा तेरा भी होगा, बस रात को अपना वक्त इत्मिनान से गुजारने दे।
-योगेश गोसावी
४ दिसंबर, २०२०
मंझर ये देखकर न जाने दिल कैसे बहल जाता है।
कुछ रह गया हो मलाल दिल में, फिर भी सुकून पाता है।
-योगेश गोसावी
१० दिसंबर, २०२०
आधी रात और उसका आधा चाँद,
कुछ अधूरी बातें याद दिला गया।
तू ही बता अब योगी,
नींद न आने का कौनसा बहाना रह गया?
-योगेश गोसावी
२४ दिसंबर, २०२०
सुना है उसकी अब शादी की उम्र हो रही है।
साल बीस की रवानी इक्कीस में हो रही है।
-योगेश गोसावी
३१ दिसंबर, २०२०
जाते जाते भी २०२० कमाल कर गया।
एक काला दाग उसको भी लगा दिया।
-योगेश गोसावी
३१ दिसंबर, २०२०
मौका माँगने का कभी तूने दिया ही नहीं।
पर हर बार यहीं है माँगा की हौसला दे,
तेरे हर एक इम्तिहान को पार कर सकू।
गीरू, फिसलू पर उठने की हिम्मत ना हारू।
-योगेश गोसावी
१ जनवरी, २०२१
जिक्र तेरा अब होता नहीं,
पर यूँ तो नहीं कि तू मुझमें शामिल नहीं।
अमावस का अंधेरा है तो क्या हुआ,
पर यूँ तो नहीं कि चाँद अब बाकी ही नहीं।
-योगेश गोसावी
१२ फरवरी, २०२१
कुछ खास है तुझमें, जो हर दिन नया लगता है।
बढ़ती उम्र का असर मानो थम सा जाता है।
-योगेश गोसावी
६ मार्च, २०२१
तय जो किया उसने,
अपने ही जैसे किसी औरत को हात देगी।
वादा है मेरा आपसे,
किसी एक दिन वो मोहताज ना रहेगी।
-योगेश गोसावी
८ मार्च, २०२१
ओंकार का हुंकार तू जब जब करेगा,
हलाहल हो कोई भी, अमृतसा काम करेगा।
-योगेश गोसावी
११ मार्च, २०२१
मित्र, तू भगवान जैसा होके भी इंसान सा लगता है।
आते जाते वक्त प्यार देकर पूरा दिन जलाता है।
-योगेश गोसावी
११ मार्च, २०२१
माना कि रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ कमी नहीं होगी।
पर बैठो अगर इत्मिनान से कभी, तो कमी हमारी भी पाओगे देख लेना तुमही।
-योगेश गोसावी
१२ मार्च, २०२१
दुरियोंकी रजाईपर कुछ यादों की सिलवटे थी।
ना जाने आज क्यों नींद में सपनों की कुछ कमीसी थी।
चंद महीनों की तो बात थी पर,
कोई ना समझा जिंदगीकी भी कुछ अपनी तैयारी थी।
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२१
समय रात का इस कदर गहरा था,
ना चाहते भी चाँद को अब अपने घर निकलना था।
और एक हम थे,
कल फिर किस बहाने जिंदगी से मुस्कुराये यही सोच से लडना शुरू था।
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२१
कुछ ना सोचियेगा हमारा पेश आने का तरीका देखकर।
कुछ भी हो हालात हम अपनी धुन में जीते है!
इसलिये तो शहर में नाम कम पर चर्चे अपने ही है।
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२१
तूफ़ानोंसे क्या लड़ना जो कुछ पल के मेहमां है।
ख़ामोशियोंसे लडो, तो मैं समझू कुछ बात तुम में भी है।
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२१
सपनों की चादर आज कुछ यादों से थोड़ी गिली हुई!
कुछ यादें हकीकत का हाथ थामें दूर भागती जो नजर आयी।
-योगेश गोसावी
१७ मार्च, २०२१
कभी ना सोचा था कि ऐसा दिन भी होगा,
दफ्तर ना जाना हो तो उससे भी प्यार होगा।
-योगेश गोसावी
२१ मार्च, २०२१
यादों की झोली से कुछ यादें गीरी शायद,
कुछ अफसोस तो ना हुआ।
पर झोला कुछ हल्का हुआ तो समझ आया,
बचा सफर अब और आसान जो हुआ।
-योगेश गोसावी
२८ मार्च, २०२१
तू नशा नहीं, आदत है मेरी|
तू गर छूट जायें, तो जीना ही नहीं|
-योगेश गोसावी
३१ मार्च, २०२१
एक अलग सा जुनून हैं इसमें, हर बार हमें ये बुलाता है।
सबसे ऊँचा हैं दुनिया में, फिर भी हिमालय इस छोटे दिल में समाता है।
-योगेश गोसावी
४ अप्रेल, २०२१
कुछ ना पानेकी चाहत ने हमें इस कदर मशहूर कर दिया|
किसीने हमे निकम्मा, तो किसीने बदनसीब करार दिया|
-योगेश गोसावी
२० अप्रैल, २०२१
रामसा बनना अब किसीको न आसान होगा।
कलियुग में पिता वचन को निभाने कौन वनवास अपना लेगा?
गर दिखाई किसीने हिम्मत, तो यकीन दिल में इतना रखना,
जब होगी जरुरत, तेरे साथ भी मेरा राम होगा।
-योगेश गोसावी
२१ अप्रैल, २०२१
अधूरी उस रात का मलाल अब भी बाकी है.
आधी बची उन बातों का कर्ज अभी बाकी है।
ऐ जिंदगी, तू इतनी भी जालिम ना होना,
की हम भूल जाए, इतनी सारी बाधाओं के बाद हसना अभी बाकी है।
-योगेश गोसावी
७ मई, २०२१
नूर कुछ ऐसा ही आए दसो दिशाओं से,
उजागर हो सबका आसमां अब खुशियों की फुलझडियों से।
-योगेश गोसावी
१ जून, २०२१
खामोश है जमाना और खामोशी चिल्ला रही है।
कब तक रहेगी यूंही अकेली, दर्द भरा सवाल पूछ रही है।
-योगेश गोसावी
१ जून, २०२१
कुछ तमन्नाओं का यादोंसे झगडा हो रहा था।
हर कोई अपनी नाकामयाबी की वजह दूसरे को मान रहा था।
-योगेश गोसावी
२२ जून, २०२१
सिर्फ दवा थे हम, आज जाके एहसास हुआ।
बीमारी जाने के बाद, एकबार भी जो जिक्र हमारा ना हुआ।
-योगेश गोसावी
१७ जुलाई, २०२१
खुशियोंकी सदा कुछ ऐसे उमड़ आयी,
परेशानियों में साथ थे, उनको बहा ले गई।
-योगेश गोसावी
१७ जुलाई, २०२१
कुछ ना खोया कभी, खोकर भी उसे।
हसरतें कभी थी ही नहीं पाने की उसे।
एक कमी तो हरदम रहेगी दिल में तेरे,
चाहें कितना भी तू हसें, दुनियाके लिये।
-योगेश गोसावी
१८ जुलाई, २०२१
क्या कभी ऐसा भी किसीके साथ होता है?
उनसे ज्यादा उनके साथ बिताए पलों से प्यार होता है?
ना मिले अब वो, तो भी कोई गिला नहीं होता,
है जो थोड़ी यादें, अब उनसे ही है गुजारा होता।
कुछ गलतियोंको को ग़लत कहना भी गलत है होता,
गर भटक कर मुसाफिर उन्ही के कारण ही है मंजिल पाता।
-योगेश गोसावी
२९ जुलाई, २०२१
बात बस खुबसूरती की होती, तो तुमसे हसीं कोई न था।
पर बात एहसासों की थी, जो तुममें जरा भी न था।
-योगेश गोसावी
३१ जुलाई, २०२१
रौंदता चला आ रहा था तूफान मेरी ओर,
बाहें पसारे खडा था मैं, चला जाऊं किसी भी छोर।
शायद मेरी यहीं बात उसे पसंद बहुत आयी,
अंगड़ाई लेके वहीं हवा मुझसे लिपट खूब है रोई।
-योगेश गोसावी
१२ अगस्त, २०२१
ले चले थे वो हमें, फिर वहीं जगह,
गुजारी थी कुछ यादें जहां हसते हसाते।
कौन समझाएं उन्हें अब ये,
रह नहीं पाते गुमसुम वहां, खिलखिलाते थे जहां बिना कुछ बातों के।
-योगेश गोसावी
१२ अगस्त, २०२१
तीन रंगोवाला दिल है हमारा, दो दिन ही है जो दिखता।
पूरे साल पता नहीं अलग अलग क्यों है रहता?
-योगेश गोसावी
१५ अगस्त, २०२१
आखरी पल था वो तब जाके एहसास हुआ,
बात मुझ में भी खूब थी, बस पता ही ना चला।
-योगेश गोसावी
२० अगस्त, २०२१
हो जाता हूं थोडा आवारा जब साथ होते हो आप।
खो जाने का डर नहीं, जब सफर शुरु है ऐसे हमसफ़र के साथ।
-योगेश गोसावी
२२ अगस्त, २०२१
मिन्नते ना कर योगी तू किसिसे, दुनिया कभी खुदा न थी।
समझले जो खुद को, उसे खुदा की भी जरूरत न थी।
-योगेश गोसावी
२७ अगस्त, २०२१
खुलकर बोल ना सके उनसे, जो बातें उन्हें पता ही थी।
बिछड़ना तो तकदीर में था ही, पर मिले इसी जनम, तकदीर भी हमारी कुछ कम कमाल न थी।
-योगेश गोसावी
२८ अगस्त, २०२१
दुनिया से ना पूछो उनकी सलाह योगी,
दिल से बात कर लेते, तो रास्ते यूहीं मिल जाते।
-योगेश गोसावी
४ सितंबर, २०२१
सामान्य से असामान्य की यात्रा कभी पूरी नहीं होगी।
गुरु का स्थान जो खाली हो, कभी तेरी नैया पार ना होगी।
-योगेश गोसावी
४ सितंबर, २०२१
दो बातें भी ना हुई, ये कैसी मुलाकातों का दौर चला?
योगी ये कैसा यादों का सैलाब उमड़ा, जो हमे चूप कर ही माना?
-योगेश गोसावी
४ अक्टूबर, २०२१
झांक तू अपने अंदर योगी,
एक सूरज वहां भी होगा।
दुनिया का ना सही,
तेरा रास्ता तो उजागर करेगा।
-योगेश गोसावी
८ नवंबर, २०२१
पांच साल का सुहाना सफर खत्म होने को है।
कुछ हसीन यादोंके साथ सफर शुरू होने को है।
-योगेश गोसावी
१९ नवंबर, २०२१
सही को सही, गलत को गलत,
खुल के ना कह पाया मैं।
आजादी के बरसों बाद भी,
आझाद ना हो पाया मैं।
-योगेश गोसावी
६ दिसंबर, २०२१
आजकल स्टेटस में रहने के लिए मरना पड़ता है।
जितेजी चाहे जो काम करो, कहां कौन पूछता है।
-योगेश गोसावी
८ दिसंबर, २०२१
हंस के बात करता हूं, वो मेरी आदत है।
वरना तेरे खुदगर्जी के किस्से मशहूर आज भी है।
-योगेश गोसावी
७ जनवरी, २०२२
सोचती रही कुछ पुरानी गलतियां मेरी, मैं फिर उन्हें दोहराऊंगा।
पर मैं वो मुसाफिर निकला, जो हर बार कुछ नया तलाशता रहा।
-योगेश गोसावी
१३ जनवरी, २०२२
गुज़रे हुए रास्ते से दोबारा जाना जहां हमें मंजूर नहीं,
और कुछ गलतियां हमारी मान रही है हमें उनसे फिर मिलने की चाहत बाकी है यूंही।
एकबार जिस रास्ते से गुज़रे,
फिर उसपे चलने में योगी मजा नहीं,
और न जाने कैसे पुरानी गलतियां समझ बैठी है,
जायेंगे हम उनसे मिलने यूहीं।
-योगेश गोसावी
१४ जनवरी, २०२२
आग इधर भी है, उधर भी।
जलन इधर भी है, उधर भी।
फ़र्क बस इतना है की,
गर्मी इधर है और ठंडक उधर,
ये एक पल है और वो निरंतर।
-योगेश गोसावी
१८ जनवरी, २०२२
जाने कितनों ने चाहा मुझे,
कितनों ने सराहा होगा।
पर दिल में आज भी वही है योगी,
बिन मतलब जिन्होंने याद किया था।
-योगेश गोसावी
२७ मई, २०२२
जरूरतमंद से दोस्ती हमेशा फायदे की होती है।
जरूरत खत्म ना तबतक चहल पहल,
और फिर
खुद को संवारने खामोशी भी मिलती है।
-योगेश गोसावी
३ जून, २०२२
कभी खुद से हो जाएं प्यार,
तो जी भर कर लेना।
करोगे इंतज़ार किसी का,
पछताना शायद नसीब होगा।
खुदगर्ज कहे जमाना,
तो हंस के निकल जाना।
खुश हो अपने आप से,
ऐसे मिजाज को ना खोना।
-गोसाव्यांचा योगेश
६ ऑगस्ट, २०२२
चलो, फिर एक बार खुद से मिलने चलते है।
देखें ईस बार रास्तें, कौन से पहाड़ों से गुजरते है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२२ जनवरी, २०२३
आग ऐसी थी की दोनों पिघल जाते,
पर धूएं ने सारा मंजर बिगाड़ दिया।
-गोसाव्यांचा योगेश
२७ जनवरी, २०२३
सितारों में ढूंढा तुम्हें, पर कुछ न हासिल हुआ,
पत्थर से दिलवाले, पड़े थे जमीं पे यहां।
-गोसाव्यांचा योगेश
२७ मई, २०२३
करीब हो योगी किसीसे, तो खुशनसीब ना समझना।
जरूरत के समय की लहरें नजदीकियां बढ़ाती है, तो दूरियां भी।
-गोसाव्यांचा योगेश
११ मार्च, २०२३
चाहता हूं मैं, अब उसे मेरी जरूरत ना लगे।
दोस्ती हम निभा भी लेंगे, पर उसकी खुद्दारी को ठेस ना लगे।
-गोसाव्यांचा योगेश
१३ जून, २०२३
लगता है उन्हे, खुली किताब हूं में।
अंदाजा लगा देते है दो चार बातें देख के।
बोल देता गर सारे जज्बात, यूं हर किसी के सामने,
बदनाम कर फिरते यही लोग, गलियों शहरों बाजार में।
-गोसाव्यांचा योगेश
१५ जून, २०२३
पता नहीं दूर फलक तक क्यों कुछ दिखता नहीं?
न जाने ये बीच में उदासी का बादल है, या यादों का साया?
-गोसाव्यांचा योगेश
९ जुलाई, २०२३
हाल पूछा उनसे, तो जाने क्यों गुस्सा हो गए।
कारण पूछा तो, देर क्यों लगाई सवाल पूछ बैठे।
अब उनको कैसे बताए?
हिम्मत जुटाने में कितना समय लगे।
-गोसाव्यांचा योगेश
३ अगस्त, २०२३
कुछ लम्हें गुजरते है,
बीती याद दिलाते है।
जिंदगी मगर चलती रहती है,
नई यादें बुनती है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२ सितम्बर, २०२३
कभी चले हो पुरानी राहों पे कुछ सालों बाद?
लौट आता हैं वही पुराना दौर किसी अजनबी के साथ!
-गोसाव्यांचा योगेश
२ सितम्बर, २०२३
खामोशियोंसे प्यार कर तूने जाने कितने रिश्ते है तोड़े।
जरा देख, योगी ने दो बातों से कितने नये है जोड़े।
-गोसाव्यांचा योगेश
२ सितम्बर, २०२३
जिंदगी, तेरी जिंदादिली का राज जाने कितनों को है बताया।
पर वो सच नहीं कह के जाने कितने मुर्दा जिए जा रहे तेरा साया।
-गोसाव्यांचा योगेश
२ दिसंबर, २०२३
याद हैं तुम्हे वो शाम,
जब हस के तुमने हमे घर चलोगे पूछा था।
कुछ देर सोचकर,
हमने भी कुछ दिनों को रंगीन बनाया था।
-गोसाव्यांचा योगेश
१४ दिसंबर, २०२३
उतारूंगा आज उसे दीवार से, जो कभी नया था।
हमे किसी ने बोला भी था, खुश रहो नया साल हैं।
साल हो गया, फिर कभी ना उसने हाल पूछा।
अब, कल एक और नए को दीवार पे टांगना है।
कौन, कहां फिर आकर मिले, हाल पूछे,
ईस बात की इंतजार में और एक साल जीना हैं।
-गोसाव्यांचा योगेश
३१ दिसंबर, २०२३
जाने दिया उसे,
कटी पतंग थी।
डोर किसी और एक हाथ,
काटी किसी और ने थी।
-गोसाव्यांचा योगेश
२० जनवरी, २०२४
आने से, जाने से, होने से तेरे,
ना बदलेगा नसीब मेरा।
हो सकता है खुशी थोड़ी कम ज्यादा हो,
पर नसीब खुद के भरोसे ही लिख यही रोज मांगा है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२० जनवरी, २०२४
हालत मेरी ना समझे उसे, कुछ बताए बिना, तो क्या कहना?
दोस्त थे, दोस्त ही रहेंगे, उससे आगे अब और ना कुछ होना।
-गोसाव्यांचा योगेश
२२ जनवरी, २०२४
बेदखल कर दिया उसने हमें, महफिल में नजरंदाज करके।
चलो कोई गिला नहीं।
यादों से करे हमें वो बेदखल, योगी ये उसके बस की बात नहीं।
-गोसाव्यांचा योगेश
१० फरवरी, २०२४
वो कहते है योगी, पहचान बढ़ाओ,
कब कौन काम आए पता नहीं।
एक हम पागल थे, रिश्ते बनाने निकले थे।
लोग बड़े उसूलोंके है, जिंदगी गुलजार करेंगे।
-गोसाव्यांचा योगेश
२० फरवरी, २०२४
कोई बात नहीं, तुम अगर यहां नहीं हो
बस जहां हो वो जगह यहां से बेहतर हो।
कोई बात नही, आज हम साथ नहीं है
बस याद रहे, जो है किसकी बदौलत है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२५ फरवरी, २०२४
दिल और दिमाग की अलग अलग बातों में उलझे मेरे दोस्तो,
बस इतना याद रखना।
जिस दिन दोनों एक ही बातें करेंगे,
वहां से वक्त तुम्हारा होगा।
-गोसाव्यांचा योगेश
२५ एप्रिल, २०२४
उम्मीदें होंगी दुसरोंसे, तो खुशी भी उनके भरोसे होंगी।
जो करोगे उम्मीदें खुदसे, हर दिन खुशियां संग होगी।
-गोसाव्यांचा योगेश
८ मे, २०२४
मिलें हो आज, बरसों बाद।
कुछ बातें अभी भी हैं, होठों पर तुम्हारे,
कुछ खयाल अभी भी है, मन में तुम्हारे।
आज फिर और एक बार, वक्त नहीं हैं पास मेरे।
-गोसाव्यांचा योगेश
१६ मे, २०२४
होठों से लगा ही लिया उसे हमने,
जमाना ना ना कहता रहा।
तीस साल गुजर गए, अभी भी छोड़ ना सका।
चाय की प्याली हैं दोस्तों, योगी जिससे वफा करता रहा।
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ मे, २०२४
जहर ही तो था, जो हमने होठों से लगाया था।
मना कर रही थी दुनिया, पर उसी से इश्क हुआ था।
अब कैसे समझाए तो कैसे समझाए सबको,
जहर जो हमे किसीने चाय बोल कर पिलाया था।
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ मे, २०२४
अंधियारा हों कितना भी घना,
सवेरा चाहे हो कितना भी दूर, कोई गिला नहीं।
खुद का आसमां हो रोशन इतना तो हूं मैं काबिल,
उजालों ने नहीं, अंधेरों ने दी है तालीम हमे सही।
-गोसाव्यांचा योगेश
२९ जुलै, २०२४
नब्बे का हुआ है एक पन्ना,
लोग उसे गुलजार कहते है।
ना जाने हमे ही क्यूं,
वो जिंदगी की किताब लगता हैं।
-गोसाव्यांचा योगेश
१८ ऑगस्ट, २०२४
ना जाने क्यूं मैं, तूफानों से दूर भागता था।
तुम जब से मिले, बारिशों में नाचना आ गया।
-गोसाव्यांचा योगेश
२५ सप्टेंबर, २०२४
उलझे हो अपने गुलशन में, कोई बात नहीं।
गर आओ कभी थोड़ी देर बाहर, तो खड़े है हम वहीं।
दो बातें हो, थोड़ी मुस्कान, थोड़े आसूं, तेरे और मेरे।
फिर लौटेंगे अपने अपने गुलशन में, करेंगे वही जो हो सही।
-गोसाव्यांचा योगेश
२९ नवंबर, २०२४
यार दिसंबर, तू मत आना।
फिर वही यादें लाता है, थोड़ा हंसाता है, ज्यादा रुलाता है।
न जाने तुझे ये कर के कौनसा सुकून मिलता है?
हो सके तो इस साल जल्दी निकलना,
नए साल के स्वागत में, तेरे दर्द की दवा दिला देना।
-गोसाव्यांचा योगेश
३० नवंबर, २०२४
सालों बाद होठों से लगाई तो, मदहोशी में झूम गए हम।
और उस कमबख्त शराब को लगा, असरदार हुई है वो और नाच रहे है हम।
उसे अब कौन समझाए, सालों तराशकर बहकने का हुनर तराशा है हमने, यूंही नहीं लोगों को जोड़े रखे है हम।
वरना मदहोशी का आलम, उमर, ग़म, सब पीछे छोड़ आए है हम।
-गोसाव्यांचा योगेश
१ दिसंबर, २०२४
तूफानों से यूंही डरता लड़ता था मैं और मेरा साया,
हर बार गुलशन उजाड़ कर जो चलते थे वे।
एक उमर आनी पड़ी तब सारा खेल समझ आया,
जो जरूरी नहीं वो उड़ा ले जाते थे वे।
-गोसाव्यांचा योगेश
२ डिसेंबर, २०२४
इतनी बातें की, इतना सताया है तुम्हें,
फिर भी कोई गिला, कोई शिकवा नहीं।
और न जाने क्यों ये सारे लोग कहते है?
खयालों में किसी से बात करना अच्छी बात नहीं।
-गोसाव्यांचा योगेश
८ डिसेंबर, २०२४
दिसंबर की रातों में पता नहीं नींद बोझ क्यों लगती है?
ना तेरी यादों का तकिया काम आता है,
ना तेरी मुस्कुराहट की रजाई रास आती है।
लगता है अब तो हमें मिल लेना चाहिए।
वरना नए साल की नींद भी तुम्हे कोसती रहेगी,
थोड़ा तो चैन मिले, वरना कैसे वो पूरी होगी?
-गोसाव्यांचा योगेश
१६ डिसेंबर, २०२४
बिगड़े शहजादे थे हम, जब तुमसे मिले।
बिगड़े ही रहे, जब तक साथ रहे।
तुम्हें खोकर जब अब अच्छे बने,
तब भगवान से पूछ रहे, सुधारने की कीमत इतनी क्यों लिए?
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ डिसेंबर, २०२४
मिल के तुमसे सीखा है कितना कुछ,
छू कर तुम्हें पाएं है तजुर्बे ऐसे कुछ।
कलियुग में राम ही रहता मैं वरना,
मुश्किल हो जाता जीना और आसानी से मरना।
-गोसाव्यांचा योगेश
२४ डिसेंबर, २०२४
ना ग़म कर जो तुम नहीं हो उसके पहले और आखिरी,
क्या इतना कम है तुम थे उसके एक पल भी?
जो हंसाया हो, रुलाया हो उसने एक बार भी,
क्या इतना काफी नहीं है तुम्हे जिंदगी गुजारने के लिए भी?
-गोसाव्यांचा योगेश
२८ डिसेंबर, २०२४
उलझने इतनी थी, पर सब सुलझानी थी।
ताकी फुरसत से मिल सके हम और तुम।
फुरसत सामने थी और तुम भी हासिल थे,
और हम सोच में थें कैसे उलझन सुलझाए और तुम से मिल जाए।
-गोसाव्यांचा योगेश
३० डिसेंबर, २०२४
हर गुजरता साल, याद दिलाता है वो एक साल,
ना जाने कब, कैसे, कौन राहत दिलाए इस ग़मे हाल?
क्या पता कैसे आयेगा, जायेगा ये नया साल?
जख्म पुरानी भरेगा, या देकर नई कर देगा बुरा हाल।
-गोसाव्यांचा योगेश
३० डिसेंबर, २०२४
याद आती है तेरी, तो छलकने लगते है आसूं।
शुक्र है, चेहरा धोते ही मैं दुनिया के लिए तैयार होता हूं।
-गोसाव्यांचा योगेश
२५ जानेवारी, २०२५
भूल गए हो हमें, कोई गिला नहीं।
मुसाफिर हूं मैं, तू तो मेरी मंजिल नहीं।
-गोसाव्यांचा योगेश
८ फेब्रुवारी, २०२५
किसी का में बदला लूं, ये मेरी फितरत नहीं।
हर काम मैं हीं करु, ये भी तो मेरी आदत नहीं।
एक दोस्त हैं मेरा, कुछ काम मैं उसपे छोड़ता हूं।
पूजती है दुनिया उसे भगवान कह कर, मैं योगी उसे अपना यार मानता हूं।
-गोसाव्यांचा योगेश
२१ ऑगस्ट, २०२५
करोगे जो याद, तो कीमत अपनी बढ़ाते है,
ना करो तो, नाराजगी हमीं से जताते है।
है क्या कोई उपाय योगी इस दुविधा का?
हमें जिंदगी थोड़ी आसान जो बनानी है।
-गोसाव्यांचा योगेश
१७ नोव्हेंबर, २०२५
मिलते थे ऐसे, जैसे जिंदगीभर मिलना होगा।
जिंदगी ने अब ऐसे उलझा है दिया,
मिलते भी है, पर अजनबी की तरह,
लगता है जानते थे इसी चेहरे को अपनों की तरह।
-गोसाव्यांचा योगेश
१४ मार्च, २०२६
खो न जाए कोई साथ, बस इसी काम में जुड़ा था।
पर खुद को खोते पाया, तो अब सब संभाला है।
खोने वाले तो मौका ढूंढते है, अब जाके पता चला।
साथ चलनेवाले को तो इशारा भी काफी होता है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२३ एप्रिल, २०२६
खो ना जाए साथ कोई यही प्रयास रहता था,
खुद को खोते पाया तब थोड़ा समझ आया।
साथ चलनेवाले को इशारा काफी होता है,
खोने वाला तो हरदम मौके की तलाश में रहता है।
-गोसाव्यांचा योगेश
२३ एप्रिल, २०२६
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