सीमायें
कब पनपेगा प्यार इनमें दोनों तरफ सारा?
पहल शायद उसे करनी है जो रूठा है सदियोंसे,
तू ही चला था सालों पेहले जुदा होके तेरे अपनोंसे।
गले लगाने गर तू आये, तो हम हसके फैलाये बाहें,
हिम्मत कर एकबार सर उठाके मिलाने वहीं निगाहें।
हिन्द है हम, हिन्द ही रहेंग, ना समझ बस हिन्दू हमे।
तोड़ वेहम सारे पुराने, बढ़ आगे, फैला अपनी बाह पसारे।
-योगेश गोसावी
१० जनवरी, २०२०
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