इंसान
मंदिर मज्ज़िद को ताना देते हो, पर हमने ही तुम्हें देखा है|
कुछ ना कर, सब कुछ पाने को चढ़ावा चढ़ाते देखा हैं|
कुछ ना कर, सब कुछ पाने को चढ़ावा चढ़ाते देखा हैं|
सब जब होता है मनपसंद तब कहाँ रहते हो?
सरकार को ताना देने के सिवा क्या कभी कुछ करते हो?
सरकार को ताना देने के सिवा क्या कभी कुछ करते हो?
खेल ये किसी और को कोसने का कर देना अब बंद,
हम इकट्ठा चले है मौत की तरफ़, कर अपने दिल के दरवाजे बंद|
हम इकट्ठा चले है मौत की तरफ़, कर अपने दिल के दरवाजे बंद|
बस इतनी है उम्मीद तुम इंसान बनके हमेशा रहना,
ना लगेगी तब मज्ज़िद मंदिर, बस एक दूसरे का हात थामे चलना|
ना लगेगी तब मज्ज़िद मंदिर, बस एक दूसरे का हात थामे चलना|
-योगेश गोसावी
१५ अप्रेल, २०२१
१५ अप्रेल, २०२१
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