नींद
बुला लिया किसीने जल्दीसे नींद को, कोई उसकी राह देखता रेह गया।
राह देखते देखते उसकी, उसे कोई अनजान खयाल मिल गया।
करली उससे बाते चार, तो मासूम वो मुस्करा गया।
फिर थोडी और देर तक, वो खयाल नींद को दूर भगाता गया।
चाहता गर बस नींद वो, जल्द उसे मिल जाती।
वो ढूंड रहा था सुकून को, आप ही बताओ वो कैसे आती?
-योगेश गोसावी
२३ मार्च, २०२०
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