शायद
पूछनी पडती है आजकल पसंद नापसंद,
खुल के बोलने का जमाना गया शायद।
देनी पडती है सबको ही अहमियत,
खुद कमाने का जमाना गया शायद।
चाहतों को भी चाहत से देखना आता है किसे याद।
दुनियादारी कि होड़ में दिल को संभालना भूल गये शायद।
-योगेश गोसावी
२३ मार्च, २०२०
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