रीत
किसी और का एहसास हुआ, तो हर एक ने पूछा।
जब खुद का एहसास हुआ, तो किसीने ना पूछा।
कैसी है ये रीत दुनिया की, दूसरे के लिये तरसता है।
खुद की बारी आये, तो युहीं मुकर जाता है।
रीत ये तुम्हारी, कहीं तुम्हें ही न ले डूबे।
हर बार किसी और के आंगन की धूल ही न बने।
कुछ हो पाना तो, तुझे भी थोड़ा तड़पना होगा।
होके बेकरार, तुम्हें भी तो कुछ करना होगा।
-योगेश गोसावी
९ अप्रैल, २०२०
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