सुकून
आज फिर मेरा दिल रो पडा।
लोग अच्छा बोले इसलिये किसी को मरना पडा।
इंतजार उसके जाने का करते है, जीते जी एकबार जिक्र करना भी भूल जाते है।
थोड़ी तो आदत बदलो मेरे यारो।
जबतक है जान, दो बातें अच्छी कर ही डालो।
जीते जी उसको थोड़ा सुकून मिल जाये,
फिर चाहे जन्नत मिले या छूट जाये।
-योगेश गोसावी
३० अप्रैल, २०२०
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