फरिश्ता
कुछ तो बात होगी, जो थम गये थे पलभर ये पाँव।
दिल में शायद कोई तो कसक होगी, ना धूप देखी ना छांव।
चलना ही जिंदगी है, तो ये थमना किस लिये?
जाना ही है एकदिन, तो दिल का लगाना किस लिये?
मुसाफिर हूँ, पड़ाव पे रुकना ही होगा।
दो बातें सही, दिल का हाल बताना तो होगा।
पड़ाव हो तो हम जैसे आयेंगे ही,
पल दो पल दिल खोल के बैठेंगेही।
गर नहीं चाहते तुम यूँ पलभर का रिश्ता,
तो उठ औऱ चल मेरे साथ, बना दूँ तुझे फरिश्ता।
-योगेश गोसावी
५ मई, २०२०
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