भागदौड़
गर बिकना है थोड़ा महंगा, तो बेपरदा दिखना जरूरी है क्या?
दिखोगे गर आते जाते, तो कोई दाम न देगा।
ना मिलोगे कहीं तो ढूंढकर बड़ा दाम मिलेगा।
ये रीत है निराली न मिलनेवाली हर चीज है प्यारी।
जो पास है उसकी कीमतें है कहाँ किसको जाननी।
ये योगी संभाल तू अपना दामन, जो है मिला उससे भर ले अपना जीवन।
ना भाग तू व्यर्थ उसके पिछे, जिसमें दिखा ही नहीं तुझे कभी अमन!
-योगेश गोसावी
२२ जून, २०२०
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