फोन
हर बार फोन उठाकर रख देता हूँ फिरसे,
सोचकर पिछली बार कब याद किया था उसने।
दोस्ती है, तो उसे भी निभानी होगी,
मैं भूल जाऊं तो उसे भी याद दिलानी होगी।
एक तरफा प्यार है तो उसे दोस्ती कौन कहे?
रिश्तों का सारा बोझ एक ही कब तक सहे।
सब सोचकर, जानकर फोन मैं ही करूँगा,
एक तरफा प्यार हो, दोस्ती हो, मैं ही निभाऊँगा।
-योगेश गोसावी
२८ जून, २०२०
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