ना मिलना!
ना मिल के भी तुमने ऐसे एहसान किया,
कुछ राज़ को ना चाहते हुए रोशनदान दिया।
कभी पता ना चलते ऐसे राज़ खोले तुमने।
ना मिलने का वक्त अच्छी तरह निभाया तुमने।
ना मिलना भी इसकदर रास आया हमें।
खुद को संभालना खुद ही को सिखाया हमने।
-योगेश गोसावी
२३ जून, २०२०
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