मंजिल की ओर
कुछ तोहफा दे नहीं पायेंगे।
है जो थोडी बहुत यादें अपनी ऊन्हेंही समेटते रहेंगे।
गर किसीं बात का है गिला शिकवा तो उसे छोड जाना तुम,
बस मिले थे कुछ कदम, कुछ देर, उन्हें याद रखना तुम।
गिर ना जाये हम कही, उसका ही वो अंदाज था,
थाम लिया था हमने हात, बस वही पल एक सपना था।
गुजारी थी जो राते साथ, उसकी चांदणी याद आयेगी,
आनेवाले कुछ काली रातोंको और थोडा मेहकायेगी।
दोस्त है, दोस्त ही रहेंगे, कुछ और न सोचना तुम,
चलते गर थक जाओ बस याद हमे करना तुम।
मैं नहीं पुरा घर है ये तुम्हारा,
हमसफर मेरा भी तो दोस्त है तुम्हारा।
गर लगे थोडा रुकना जरुरी है, तो चले आना दोबारा।
खोल कर बैठेंगे फिर वही, पुराणी यादोंका पिटारा।
-योगेश गोसावी
२ नोव्हेंबर, २०१९
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