कुछ तेरी तरह, कुछ मेरी तरह
कुछ तेरी तरह, कुछ मेरी तरह।
नजर सबको आता है, फिर भी है तनहा,
कुछ तेरी तरह, कुछ मेरी तरह।
क्यूँ ना उसे कोई चांदनी दिला दे, कुछ रातों के लिये।
पलभर खुश होके जिंदा रेह लेगा, कुछ तेरी तरह कुछ मेरी तरह।
चल कुछ कदम उठाले आसमां की तरफ, उतार लाते है उसे जमी पर।
खुश हो जायेगा अपनों को पाकर, कुछ तेरी तरह कुछ मेरी तरह।
-योगेश गोसावी
१७ नोव्हेंबर, २०१९
Comments
Post a Comment