शोर यादोंका
रात के सन्नाटेमें भी एक अलग शोर होता है,
यादों के झगड़े सुननेका एक आलम होता है।
कुछ चिखती हुई दिल देहला देती है,
कुछ ख़ामोशसी उसी को सेहलाती है।
झगडती है एक दूसरे साथ, पर निंद भाग जाती है।
आप थक न जाओ तबतक ये कहा किसीका सुनती है।
सुलह करलो उनसे तो थोड़ा सुकून मिल जाये।
शोर करती ये यादें फिर हर रात रंगीन बनाये।
-योगेश गोसावी
२५ दिसम्बर, २०१९
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