रूहानी जिस्म
गुजारा हो ही जायेगा तेरे बगैर मेरे दोस्त!
जरूरते हमारी रूहानी थी और तेरी जिस्मानी!
रूह कहीं से कोई तो धुंड ही लेगा, ना मिलेगी तो भी गुजारा कर ही लेगा।
जिस्म तो तुम्हें हजारों मिलेंगे, न चाहो तो भी आ आ कर लिपटेंगे!
कभी जो याद आयी तो खयालो में मिल लेना।
जिस्म भी हमारा तुम्हें वहीं तड़पकर मिल ही लेगा!
गर जरूरत लगे हमारी तो चले आना एकबार जिस्म उतारकर!
मिल ही जायेंगे हम तुम्हें कही भी अपनी जान लुटाकर!
-योगेश गोसावी
२३ दिसम्बर, २०१९
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