सफर
उभरता साल पता नहीं सबको क्यों अच्छा लगता है?
दिन मेरा पहला, गुजरते साल की याद में तड़पता है।
दे जाता है कितनी अनोखी यादें, बातें और लोग।
निकल जाता हैं चुपचाप दबे पाँव, बिना किये शोर।
आनेवाला शोर करते आता है,
दो दिन में वो भी पुराना सा लगता है।
सफर जारी रहेगा यूँही, जबतक आप थकते नहीं।
फिर भी नया साल का स्वागत करते आप रुकते नहीं।
रुको, थोडा ध्यान तो दो।
जानेवाला क्या दे गया, थोड़ा सोच तो लो।
सफर तुम्हारां हो आसान यहीं है दुआ यारों।
चलता रहे सफर निरंतर मेरी यहीं शुभकामनाएं प्यारों।
-योगेश गोसावी
१ जनवरी, २०२०
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